किसानों का दर्द देख कर हमेशा हौसला बना है ओबीसी महासभा जिला अध्यक्ष का कहना आत्मबल ऐसे ही बना रहे।

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जिला-सिवनी ब्यूरो चीफ
अनिल दिनेशवर
@ किसानों का दर्द देख कर हमेशा हौसला बना है ओबीसी महासभा जिला अध्यक्ष का कहना आत्मबल ऐसे ही बना रहे

सिवनी ओबीसी महासभा जिला “अध्यक्ष” (कृषक मोर्चा) अजय साहू ने पत्रकारों की प्रसंशा करते हुए सत्ता पक्ष से असमर्थ होते हुए कहा….
क्या एक स्वतंत्र पत्रकार,दस हजार की पगार पर परिवार का पेट पालने वाला ड्राइवर,फसल बोते बिना टिप हुए मकानों में रहने वाले किसान और कार्यकर्ता-कितनों की जिंदगी लील गयी l किसी भी परिवार के लिए पैसों से कीमती उनके सदस्य होते हैं l रोते बिलखते बुजुर्ग मां-बाप,भीड़ के बीच अपने पिता/भाई का शव देखते बच्चे और उनकी पत्नियों की चीत्कार-ये सब यहीं नहीं रुकेगा l लेकिन यह रोका जाना चाहिए नौकरी-पैसा न्याय थोड़े हैl
जिन परिस्थितियों में हिंसा होती है उनके लिए जनता जिम्मेदार नहीं ठहराई जा सकती है l ऐसी परिस्थितियां कभी भी स्वतः उत्पन्न नहीं होती हैं l केंद्र सरकार जनता की मांगों-किसानों की मांगों पर हाथ पर हाथ रखे क्यों बैठी है?क्या हिंसा होती रहे?जान खोने वाले कार्यकर्ता,पत्रकारों और किसानों की गिनती ही करते रहें?किसी भी आन्दोलन में जनता आक्रोशित नजर आती ही है लेकिन क्या सरकार को इतना निरंकुश होना चाहिए?

लखीमपुर खीरी में कवरेज करते हुए किसानों के साथ ही पत्रकार रमन घायल हो गए थे जिनका निधन हो गया l एक स्वतंत्र पत्रकार के लिए न कोई ख़बर लिखी गयी और न ही ब्रेकिंग-ख़बरों में कोई स्पेस दिया गया l न ही सोशल मीडिया पर उनके परिजनों की सहायता के लिए पोस्ट दिखीं स्वतंत्र पत्रकारों को खुद का पेट भरना ही मुश्किल हो जाता है फिर ऊपर से परिवार की जिम्मेदारी भी अब सरकार को समझना ही होगा और मानना होगा।
देश के चौथे स्तम्भ को भी प्रशासनिक सुरक्षा दी जानी चाहिए गलत कामों उजागर कर स्वयं की जिंदगी दाव पर लगाने वाले पत्रकारों की जिंदगी कोई खेल नही जनता की आवाज को बुलंद करने वाले पत्रकारों को दबाने कुचलने का काम अब पत्रकार बर्दाश्त नहीं करेंगे पत्रकार संगठन को स्वयं के हक की लड़ाई मिलकर उन पदासीन जनप्रतिनिधियों से लड़नी होगी

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