बुन्देलखण्ड की प्राचीन परंपरा शेर नृत्य का हुआ आयोजन, कलाकरों ने दिखाए अपने जोहर।

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*बुन्देलखण्ड की प्राचीन परंपरा शेर नृत्य का हुआ आयोजन, कलाकरों ने दिखाए अपने जोहर.

इंडियन टीवी न्यूज़ चैनल से

ब्यूरो चीफ-लखन ठाकुर, दमोह…

दमोह – नवरात्रि पर्व के चलते करीब 150 वर्षो से चली आ रही शेर नृत्य की परंपरा को जीवित रखने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी युवा जागृति मंच के तत्वाधान में स्वर्गीय चंद्रशेखर पाठक की स्मृति में कीर्ति स्तंभ चौराहा पर शेर नृत्य का आयोजन किया गया।

जिसमे शहर की विभिन्न शेर नृत्य मंडलियों के कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। ज्ञात हो की देश भर में जिस तरह से शेर विलुप्त होने की कगार पर है, उसी तरह बुंदेलखंड की प्राचीन परंपरा शेर नृत्य भी विलुप्त होने की कगार पर है। नई पीढ़ी के लिए इस कला के बारे में किसी भी तरह की कोई जनकारी नही है।

इसलिए युवा जागृति मंच के द्वारा इस कला को संजोए रखने के उद्देश्य से यह प्रतियोगित प्रती वर्ष आयोजित कर इन कलाकारों की कला के प्रदर्शन के साथ साथ इनके लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही युवा जागृति मंच के जिला संयोजक एड. नितिन मिश्रा ने बताया कि इस परंपरा को संजोए रखने के लिए कला संस्कृति विभाग से इनके संरक्षण की अपील की है। जिससे विलुप्त हो चुकी परंपरा को संजोया जा सके।

दमोह विधायक अजय टंडन ने बताया कि विगत वर्ष कोरोना संक्रमण की वजह से प्रतियोगिता का अयोजन नही हो सका था। इस वर्ष पुनः वैकल्पिक रूप से इस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है। जिन्होंने बताया कि बुन्देलखण्ड की यह परंपरा सागर जिले से प्रारम्भ हुई थी। जो सिर्फ दमोह पहुंच सकी और अब यह खत्म होने की कगार पर है। इसलिए हम अपने धरोहर को बचाए रखना हैं। तो इस तरह के आयोजनो को प्रभावी रूप से किया जाना चाहिए।

तभी हम अपनी धरोहर को कायम रख सकते है। इस मौक़े मुख्य रूप से आयोजन समिति के अध्यक्ष एड. नितिन मिश्रा, दमोह विधायक अजय टंडन, मोनू पाठक, धरमवीर राय, सतीश जैन कल्लन, मोहन आदर्श एवं बडी मात्रा में समिति के सदस्य व कलाकरों की मौजूदगी रही।

ब्यूरो चीफ- लखन ठाकुर जिला दमोह मध्य प्रदेश

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