45 की उम्र के बाद महिलाओं को कभी भी हो सकता है मेनोपॉज, जानें इसके लक्षण

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महिलाओं में एक उम्र के बाद पीरियड्स का चक्र की शुरु होता है। इस तरह की शारीरिक स्थिति महिलाओं के लिए आवश्यक होती है। वहीं उम्र बढ़ने पर एक वक्त के बाद पीरियड्स खत्म भी हो जाते हैं। पीरियड्स आने की सही उम्र 12 साल होती है। हालांकि कई बार लड़कियों को 8 साल की उम्र या 15 साल की उम्र में भी पीरियड्स शुरू हो जाते हैं। वहीं पीरियड्स बंद होने की उम्र 45 से 50 साल होती है। इस स्थिति को मेनोपॉज कहा जाता है। लेकिन हर स्त्री के लिए मेनोपॉज के अनुभव अलग अलग हो सकते हैं। मेनोपॉज स्वास्थ्य की वह स्थिति है, जिसमें किसी महिला को लगातार 12 महीने पीरियड्स से नहीं गुजरना पड़ता। इस अवस्था में गर्भवती होने की संभावना कम हो जाती है। मेनोपॉज एक सामान्य स्थिति है, हालांकि इससे जुड़ी कुछ समस्याएं भी हैं। ये कैसे पता चलेगा कि किसी महिला के पीरियड्स बंद होने वाले हैं यानी महिला मेनोपॉज के करीब है? चलिए जानते हैं मेनोपॉज के लक्षण, जिससे पीरियड बंद होने के मिलते हैं संकेत।

पीरियड्स बंद होने की सही उम्र

एक्सपर्ट के मुताबिक, मेनोपॉज की शुरुआती आयु 45 से 50 साल मानी जाती है। इस उम्र की ज्यादातर महिलाओं को पीरियड्स आना बंद होने लगते हैं। हालांकि कुछ महिलाओं की ओवरी जल्दी ही काम करना बंद कर देती है। वहीं कुछ महिलाओं के पीरियड्स 50 साल की उम्र के बाद भी जारी रहते है।

मेनोपॉज के प्रकार

पीरियड्स खत्म होने से पहले पूरे एक साल के लिए पीरियड्स की कमी होने की स्थिति मेनोपॉज है। दो प्रकार के होते हैं- पेरिमेनोपॉज और पोस्टमेनोपॉज।
पेरिमेनोपॉज के दौरान अक्सर पीरियड्स अनियमित आने लगते हैं या लेट पीरियड्स होते हैं। एक दो बार से ज्यादा पीरियड्स पूरी तरह से छूट सकते हैं। ब्लड का फ्लो कभी भारी तो कभी हल्का होने लगता है।
पोस्ट मेनोपॉज की स्थिति में आपके पीरियड्स लगातार 12 महीने से ज्यादा समय तक चल सकते हैं।

अनियमित पीरियड्स

जब आपके पीरियड्स अनियमित होने लगें तो इसका एक कारण मेनोपॉज भी हो सकता है। वैसे तो स्वास्थ्य संबंधी समस्या या प्रेगनेंसी के दौरान भी मासिक धर्म अनियमित होते हैं लेकिन मेनोपॉज का यह सबसे प्रमुख लक्षण है। पीरियड बंद होने से पहले में पीरियड्स ब्लड का फ्लो कभी ज्यादा कभी कम हो सकता है।
प्राइवेट पार्ट में ड्राईनेस
पीरियड्स बंद होने से पहले महिलाओं के प्राइवेट पार्ट में सूखापन, खुजली हो सकती है। मेनोपॉज में महिला की त्वचा में कटने-फटने की समस्या होने पर इंफेक्शन फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है।

हॉट फ्लैशेस

हॉट फ्लैशेस में शरीर के ऊपरी हिस्से में गर्मी ज्यादा लगती है। पीरियड बंद होने की स्थिति में चेहरे, गर्दन और सीने में ज्यादा गर्मी महसूस हो सकती है। अधिक पसीना आना और त्वचा पर लाल चकत्ते आ सकते हैं।
अनिद्रा की शिकायत
मेनोपॉज की स्थिति में नींद आने में परेशानी होने लग सकती है। महिला में डिप्रेशन, चिंता या मूड स्विंग के लक्षण देखे जा सकते हैं। इसके अलावा भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है।

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