इंडियन टीवी न्यूज़ सुशील चौहान
जिला ब्यूरो चीफ
सिवनी:शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज ग्राउंड सिवनी में कृषि विज्ञान मेला का आयोजन हुआ। मेले में जिलेभर से बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर आधुनिक वैज्ञानिक एवं प्राकृतिक खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम को संबोधित कर सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।इस पूरे वर्ष किसानों की आय बढ़ाने खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाने तथा नई तकनीकों को खेत तक पहुंचाने पर विशेष फोकस रहेगा।उन्होंने कहा कि सिंचाई के क्षेत्र में तेजी से विस्तार किया जा रहा है और प्रदेश में 55 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि सिंचित हो रही है जिसे आने वाले वर्षों में और बढ़ाया जाएगा।उन्होंने आधुनिक कृषि को समय की मांग बताते हुए ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों उन्नत बीजों ड्रोन आधारित छिड़काव मृदा परीक्षण और वैज्ञानिक खेती के महत्व पर जोर दिया।साथ ही उन्होंने कहा कि किसान सम्मान निधि सहित केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं से किसानों को सीधा आर्थिक संबल मिल रहा है, जिससे खेती में निवेश और आत्मविश्वास दोनों बढ़े हैं।उन्होंने किसानों से अपील की कि वे प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लें और नई तकनीकों को अपनाकर अपनी आय दोगुनी करने की दिशा में आगे बढ़ें।
विधायक दिनेश राय ने अपने उद्बोधन में कहा कि अब समय परंपरागत खेती से आगे बढ़कर ज्ञान आधारित खेती का है। उन्होंने कहा कि किसान अपनी भूमि की उर्वरता जल धारण क्षमता जल स्रोत और बाजार की मांग का अध्ययन कर फसल चयन करें ताकि कम लागत में अधिक लाभ मिल सके।उन्होंने प्राकृतिक खेती को भविष्य की खेती बताते हुए कहा कि इससे मिट्टी की सेहत सुधरेगी उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ेगी और स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।उन्होंने समन्वित खेती मॉडल पर विशेष जोर देते हुए कहा कि फसल उत्पादन के साथ पशुपालन दुग्ध उत्पादन, बागवानी मधुमक्खी पालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को जोड़कर किसान जोखिम कम कर सकते हैं और सालभर आय सुनिश्चित कर सकते हैं।उन्होंने सौर ऊर्जा आधारित पंप और कृषि उपकरणों को अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि इससे बिजली खर्च कम होगा और किसान ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेंगे।उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को गांव स्तर तक प्रशिक्षण तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएं।
पूर्व सांसद ढालसिंह बिसेन ने अपने उद्बोधन में कहा कि हरित क्रांति ने उत्पादन बढ़ाया लेकिन रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग ने मिट्टी, पानी और मानव स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाला है।उन्होंने कहा कि आज कई बीमारियों का एक बड़ा कारण भोजन की गुणवत्ता में गिरावट है, इसलिए हमें फिर से प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर लौटना होगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल खेती का तरीका नहीं, बल्कि जीवनशैली का परिवर्तन है जो मिट्टी को बचाएगी जल स्रोतों को सुरक्षित रखेगी और आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ भविष्य देगी उन्होंने बताया कि सरकार भी इस दिशा में किसानों को प्रशिक्षण प्रोत्साहन और जैविक उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने के प्रयास कर रही है। उन्होंने किसानों और आम नागरिकों से अपील की कि वे जैविक उत्पादों को अपनाएं और प्राकृतिक खेती को जनआंदोलन का रूप दें।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष मालती डेहरिया जिला भाजपा अध्यक्ष मीना बिसेन पूर्व विधायक राकेश पाल तथा कलेक्टर शीतला पटले सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
विभागीय योजनाओं पर केंद्रित स्टॉल रहें विशेष आकर्षण आयोजित मेले में कृषि उद्यानिकी, पशुपालन मत्स्य ग्रामीण आजीविका मिशन सहित विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाए गए जहां प्राकृतिक खेती जैविक उत्पादन, पराली प्रबंधन फार्मर रजिस्ट्री ई-विकास प्रणाली उन्नत बीज उर्वरक एवं आधुनिक कृषि यंत्रों की जानकारी दी गई।कृषि वैज्ञानिकों ने परिचर्चा के माध्यम से किसानों की समस्याओं का समाधान किया वहीं जैविक एवं प्राकृतिक हाट बाजार आकर्षण का केंद्र रहा। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों द्वारा विभिन्न योजनाओं के हितलाभ का वितरण के साथ ही विभागीय स्टॉल का अवलोकन कर सभी को प्रोत्साहित किया गया।