*डिंडौरी में खेल सामग्री का खेल:नियमों को ताक में रखकर स्कूलों में पहुंचाई जा रही सामग्री, जिम्मेदार बोले- वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश पर मजबूरी में करना पड़ रहा काम*

डिंडौरी जिले के सरकारी स्कूलों में नियम कायदों को ताक में रखकर खेल सामग्री की सप्लाई किए जाने का मामला सामने आया है। शिक्षा विभाग के अधिकारी चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए स्कूलों में जबरन खेल सामग्री की किट थमा रहे हैं, जिसे लेकर शिक्षक हैरान और परेशान हैं।
दरअसल राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल ने डिंडौरी जिले के 1804 सरकारी स्कूलों में खेल सामान खरीदने के लिए 1 करोड़ 12 लाख 45 हजार रुपए का बजट जारी किया है। शासन के नियमों के मुताबिक खेल सामग्री की खरीददारी शाला प्रबंधन समितियों से कराए जाने का प्रावधान है,
लेकिन शिक्षा विभाग के अफसरों ने नियम कायदों को दरकिनार करते हुए चहेते ठेकेदारों के जरिए स्कूलों में जबरन खेल सामग्री की सप्लाई करवाई। जनशिक्षा केंद्रों में खेल सामग्री किट के भंडार लगे हुए हैं, जिसे शिक्षा विभाग के अफसरों के मौखिक निर्देश पर स्कूलों में सप्लाई करने के लिए रखवाया गया है। जिसका न तो कोई बिल है और न ही कोई आदेश।
*जिम्मेदार अधिकारियों के गोलमोल जवाब*
बजाग विकासखण्ड के खरगहना जनशिक्षक जग्गनाथ परना से इस मामले को लेकर सवाल किए तो उनका कहना है कि विकासखंड शिक्षाधिकारी बजाग के मौखिक आदेश पर उन्होंने जनशिक्षा केंद्र में खेल सामग्री से भरे बेग को रखवाया है।
वहीं इस मामले में विकासखंड शिक्षाधिकारी बीएस पन्द्राम का कहना है कि बड़े अधिकारी के मौखिक आदेश पर उन्हें नियम विरुद्ध कार्य करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। पूर्व कैबिनेट मंत्री ओमकार मरकाम ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए प्रदेश सरकार पर निशाना साध चुके है।
इस मामले में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी राघवेंद्र मिश्रा का कहना है कि यह मामला आदिवासी विकास विभाग के दायरे में आते है, इसमें हमारा कोई रोल नहीं है। वहीं आदिवासी विकास विभाग के आयुक्त संतोष शुक्ला का कहना है कि मिलिए फिर बताते है।
इंडियन टीवी न्यूज़ संवाददाता मो0 सफर ज़िला डिंडोरी मध्य प्रदेश