रिपोर्ट अजय सिंह तोमर
पोरसा|एकीकृत महिला एवं बाल विकास परियोजना पोरसा में पोषण पखवाड़ा उत्साहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम का संचालन परियोजना अधिकारी सुश्री सपना यादव के निर्देशन में किया गया, जिसमें क्षेत्र की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को कुपोषण से बचाव और मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।
कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने सर्वे क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं को विशेष रूप से जागरूक करें। बताया गया कि बच्चे के जीवन के पहले 1000 दिन उसके मानसिक और शारीरिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए इस दौरान मां और शिशु की विशेष देखभाल जरूरी है।
कुपोषण और बीमारियों से बचाव पर जोर
कार्यक्रम में स्वास्थ्य संबंधी कई अहम बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई—
डायरिया से बचाव के लिए आसपास स्वच्छता बनाए रखें
बच्चे को स्तनपान या भोजन कराने से पहले हाथों को अच्छी तरह धोएं
समय-समय पर ओआरएस घोल का सेवन कराएं
एनीमिया से बचाव के लिए आयरन युक्त आहार जैसे अमरूद, आंवला, नींबू का सेवन करें तथा आयरन की गोलियां लें
स्तनपान और पोषण पर विशेष मार्गदर्शन
विशेषज्ञों ने बताया कि:
बच्चे के जन्म के तुरंत बाद स्तनपान शुरू कराना चाहिए
6 माह तक केवल मां का दूध ही सर्वोत्तम आहार है
6 माह के बाद ही ऊपरी आहार शुरू करें
2 वर्ष तक स्तनपान जारी रखना लाभकारी है
घर-घर तक पहुंचेगा संदेश
परियोजना अधिकारी ने सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे इन संदेशों को घर-घर तक पहुंचाएं, ताकि कुपोषण मुक्त समाज की दिशा में ठोस कदम उठाया जा सके।
इस कार्यक्रम में पोरसा परियोजना की लगभग सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। पर्यवेक्षकों में श्रीमती सुनीता तोमर, कृष्णा निगम, गुंजन श्रोती, प्रतिमा तोमर और सावित्री परमार सहित अन्य मौजूद रहे।
निष्कर्ष:
पोषण पखवाड़ा के माध्यम से क्षेत्र में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किया गया, जो भविष्य में कुपोषण के खिलाफ एक मजबूत कदम साबित होगा।