रिपोर्ट अजय सिंह तोमर
पोरसा|भगवान भोलेनाथ की आराधना को सनातन धर्म में विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई शिव भक्ति से सभी प्रकार के कष्टों, दोषों और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। विशेष रूप से जब एक ही स्थान पर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हो जाए, तो इसका पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। यही विशेषता आज पोरसा के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मुक्तिधाम को देशभर में पहचान दिला रही है।
मुक्तिधाम के रचनाकार समाजसेवी डॉ. अनिल गुप्ता के अथक प्रयासों और दानदाताओं के सहयोग से यहां “महाकाल लोक” का भव्य निर्माण किया गया है, जिसमें भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग स्थापित किए जा रहे हैं। इस अनूठी पहल की ख्याति अब दूर-दराज के शहरों तक पहुँच चुकी है।
इसी क्रम में दक्षिण भारत के प्रमुख शहर हैदराबाद से भगवान भोलेनाथ के अनन्य भक्त श्री राकेश कुमार गुप्ता अपनी धर्मपत्नी श्रीमती अरुणा गुप्ता के साथ पोरसा पहुँचे। उन्होंने यहां आकर भगवान महाकाल का विधि-विधान से विशेष अभिषेक किया तथा अपनी मनोकामनाओं की अर्जी लगाई। श्रद्धालु दंपति अपने साथ हरिद्वार से पवित्र गंगाजल भी लेकर आए थे, जिससे उन्होंने पंचामृत के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक किया।
पूजा-अर्चना के पश्चात उन्होंने बताया कि एक ही स्थान पर 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का अनुभव अत्यंत अलौकिक और आत्मिक शांति प्रदान करने वाला रहा। उन्होंने मुक्तिधाम परिसर की भव्यता, स्वच्छता और आध्यात्मिक वातावरण की सराहना करते हुए इसे अद्वितीय स्थल बताया।
इस अवसर पर डॉ. अनिल गुप्ता एवं श्रीमती लक्ष्मी गुप्ता द्वारा श्रद्धालु दंपति का शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मान किया गया।
क्या हैं 12 ज्योतिर्लिंग, क्यों है इनका महत्व
हिंदू धर्म में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों का विशेष महत्व है। “ज्योतिर्लिंग” का अर्थ है – प्रकाश का वह दिव्य स्तंभ, जिसमें स्वयं भगवान शिव प्रकट हुए। इन 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन और पूजन से व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
देशभर में स्थित प्रमुख 12 ज्योतिर्लिंग इस प्रकार हैं:
1. सोमनाथ मंदिर
2. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग
3. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
4. ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग
5. केदारनाथ मंदिर
6. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग
7. काशी विश्वनाथ मंदिर
8. त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग
9. वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग
10. नागेश्वर ज्योतिर्लिंग
11. रामेश्वरम मंदिर
12. घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग
इन सभी ज्योतिर्लिंगों की स्थापना पोरसा मुक्तिधाम में एक साथ होना इस स्थल को और भी पवित्र और विशेष बनाता है।
शाम की आरती में दिखा दिव्य नजारा
शाम के समय मुक्तिधाम परिसर का दृश्य अत्यंत मनमोहक हो उठता है। पक्षियों का मधुर कलरव, आकर्षक धार्मिक आकृतियाँ, सुंदर फव्वारे, सेल्फी पॉइंट और पक्षियों के लिए बनाए गए घर श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं। “ॐ” और “जय महाकाल” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
इस अवसर पर सुमन महेश पेगोरिया, दोजी राम राठौर सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि समाज में एकता और समरसता का भी संदेश दे गया।
निष्कर्ष:
पोरसा का मुक्तिधाम अब केवल एक स्थानीय धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर आस्था का केंद्र बनता जा रहा है। 12 ज्योतिर्लिंगों की स्थापना और महाकाल लोक की भव्यता इसे आने वाले समय में देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों की श्रेणी में खड़ा कर सकती है।