किशोर कुमार छत्तीसगढ़ स्टेट रिपोर्टर इंडियन टीवी न्यूज नेशनल
रायपुर।
विश्व नेत्रदान दिवस के अवसर पर एक ओर जहां नेत्रदान के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर कार्निया प्रत्यारोपण की जरूरत वाले मरीजों की लंबी प्रतीक्षा सूची अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। पिछले पांच वर्षों में प्रदेश में करीब 1200 लोगों ने नेत्रदान किया, लेकिन इसके बावजूद सैकड़ों मरीजों को समय पर कार्निया नहीं मिल पा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आंखों की रोशनी खो चुके कई मरीजों के लिए कार्निया ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प होता है। हालांकि, नेत्रदान को लेकर समाज में फैली भ्रांतियां और जागरूकता की कमी के कारण पर्याप्त संख्या में दान नहीं हो पा रहा है।
डॉक्टरों का कहना है कि मृत्यु के बाद 4 से 6 घंटे के भीतर नेत्रदान किया जा सकता है और इससे मृतक के चेहरे की बनावट पर कोई असर नहीं पड़ता। एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो लोगों की रोशनी वापस लाई जा सकती है।
विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे नेत्रदान का संकल्प लें और अपने परिजनों को भी इसकी जानकारी दें। उनका मानना है कि यदि समाज में फैली गलतफहमियां दूर हों और अधिक लोग आगे आएं, तो प्रतीक्षा सूची में शामिल हजारों मरीजों को नई रोशनी मिल सकती है।
मुख्य बातें:
पिछले पांच वर्षों में लगभग 1200 नेत्रदान।
कार्निया ट्रांसप्लांट के लिए मरीजों की लंबी प्रतीक्षा सूची।
भ्रांतियों और जागरूकता की कमी से प्रभावित हो रहा नेत्रदान।
एक नेत्रदाता दो लोगों को दृष्टि देने में मदद कर सकता है।
विशेषज्ञों ने नेत्रदान को महादान बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से इसमें भागीदारी की अपील की है।