✍ किशोर कुमार छत्तीसगढ़ स्टेट रिपोर्टर इंडियन टीवी न्यूज नेशनल
नि:शुल्क रक्तदान के बाद भी ब्लड बैंक पैसे क्यों लेते हैं? जानिए इसकी असली वजह
भिलाई /विशेष समाचार। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि जब वे स्वयं निःस्वार्थ भाव से रक्तदान करते हैं, तो जरूरत पड़ने पर ब्लड बैंक से रक्त लेने के लिए शुल्क क्यों देना पड़ता है। कई बार लोग इसे रक्त की खरीद-बिक्री समझ लेते हैं, जबकि वास्तविकता कुछ और है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ब्लड बैंक रक्त के लिए नहीं, बल्कि उसकी जांच, प्रसंस्करण, भंडारण और वितरण पर होने वाले खर्च के लिए निर्धारित शुल्क लेते हैं। रक्तदान के बाद प्रत्येक यूनिट रक्त की कई अनिवार्य जांचें की जाती हैं, जिनमें एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी, मलेरिया और सिफिलिस जैसी गंभीर बीमारियों की स्क्रीनिंग शामिल होती है।
इसके अलावा रक्त को अलग-अलग घटकों जैसे रेड ब्लड सेल, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स में विभाजित किया जाता है। इन सभी प्रक्रियाओं के लिए विशेष मशीनें, रक्त बैग, रसायन, टेस्ट किट, रेफ्रिजरेशन सिस्टम और प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ की आवश्यकता होती है। इन व्यवस्थाओं पर होने वाले खर्च की पूर्ति के लिए ब्लड बैंक प्रोसेसिंग शुल्क लेते हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत में ब्लड बैंकों को रक्त बेचने की अनुमति नहीं है। वे केवल सरकार और नियामक संस्थाओं द्वारा निर्धारित प्रोसेसिंग चार्ज ही वसूल सकते हैं। इसलिए मरीजों से लिया जाने वाला शुल्क रक्त की कीमत नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित और उपयोग योग्य बनाने की प्रक्रिया का खर्च होता है।
हालांकि कई सरकारी अस्पतालों, थैलेसीमिया मरीजों और विशेष परिस्थितियों में मरीजों को नियमानुसार रियायत या निःशुल्क रक्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी रहती है।
निष्कर्ष: रक्तदान पूरी तरह निःशुल्क और मानवता की सेवा है, लेकिन रक्त को सुरक्षित रूप से मरीज तक पहुंचाने के लिए होने वाली तकनीकी और चिकित्सकीय प्रक्रियाओं की लागत के कारण ब्लड बैंक निर्धारित शुल्क लेते हैं। इसलिए यह रक्त की बिक्री नहीं, बल्कि उसकी प्रोसेसिंग और रखरखाव का खर्च होता है।