सुल्तानपुर: भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और आत्मीयता का पर्व रक्षाबंधन सुल्तानपुर में श्रद्धा और भावनाओं के साथ मनाया गया। इसी क्रम में जिला कारागार में भी रक्षाबंधन का आयोजन किया गया, जहां बंदी भाइयों की माताएं और बहनें उन्हें राखी बांधने के लिए पहुंचीं।
307 बंदियों को 478 महिलाओं ने बांधी राखी
शासन और कारागार मुख्यालय के निर्देशों के अनुपालन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान 307 बंदियों को राखी बांधने के लिए 478 महिलाएं 103 बच्चों के साथ जिला कारागार पहुंचीं। सुबह से ही कारागार परिसर में बहनों और परिजनों की आवाजाही देखने को मिली।
बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा और उनके सुखद भविष्य की कामना की। लंबे समय बाद इस तरह मुलाकात का मौका मिलने पर कई परिवारों के लिए यह पल भावुक भी रहा।
महिला बंदी ने भाई की कलाई पर बांधा रक्षा सूत्र
रक्षाबंधन के मौके पर एक भावुक दृश्य भी देखने को मिला। कारागार में निरुद्ध एक महिला बंदी ने अपने पुरुष बंदी भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा। उसने अपने भाई के जल्द रिहा होने और बेहतर भविष्य की कामना की।
रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। जिला कारागार में आयोजित इस कार्यक्रम ने भी यह संदेश दिया कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, भाई-बहन के रिश्ते में स्नेह और अपनापन कायम रहता है।
सुख-समृद्धि की कामना
रक्षाबंधन के अवसर पर सभी ने भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम और विश्वास हमेशा बनाए रखने तथा परिवारों में सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।