ब्यूरो चीफ सुंदरलाल जिला सोलन हिमाचल प्रदेश,
ऐतिहासिक पर्यटन स्थल कसौली और इसके आसपास के क्षेत्रों में हो रहे बेतहाशा निर्माण कार्य तथा पेड़-पौधों के कटान से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रहे निर्माण के लिए प्राकृतिक ढलानों से छेड़छाड़, भूमि कटान और पेड़ों की कटाई के कारण क्षेत्र का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता जा रहा है। बरसात के मौसम में इसके गंभीर परिणाम सामने आने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्यों के दौरान निकलने वाले मलबे को कई स्थानों पर नदी-नालों और प्राकृतिक जल निकासी वाले रास्तों के समीप डाल दिया जाता है। इससे छोटे नदी-नाले और पानी के प्राकृतिक बहाव के रास्ते अवरुद्ध हो जाते हैं। भारी बारिश होने पर पानी अपने पुराने रास्ते से न बहकर नई दिशा में बहने लगता है, जिससे भूमि कटाव, भूस्खलन और सड़कों को नुकसान होने का खतरा बढ़ जाता है।
कसौली जैसे पहाड़ी पर्यटन क्षेत्र में पेड़-पौधे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मिट्टी को बांधकर रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पेड़ों की जड़ें भूमि को मजबूती प्रदान करती हैं, लेकिन निर्माण के लिए बड़े स्तर पर पेड़ों और हरित क्षेत्र को नुकसान पहुंचने से पहाड़ों की ढलान कमजोर हो रही है। ऐसे में लगातार बारिश होने पर मिट्टी के खिसकने और भूस्खलन की आशंका बनी रहती है।
सोलन जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में अनियंत्रित निर्माण, पहाड़ी कटान और हरित क्षेत्र के नुकसान को लेकर हाल में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भी गंभीरता दिखाई है तथा संबंधित क्षेत्रों में पर्यावरणीय नियमों के पालन और निर्माण गतिविधियों की निगरानी पर जोर दिया है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभागों से मांग की है कि कसौली तथा आसपास के क्षेत्रों में चल रहे निर्माण कार्यों की जांच की जाए। निर्माण स्थलों पर मलबा नालों में डालने पर सख्ती से रोक लगाई जाए तथा प्राकृतिक जल निकासी के रास्तों को अवरुद्ध करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही बिना अनुमति पेड़ काटने और पहाड़ी कटान करने वालों पर भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
लोगों का कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन विकास के नाम पर पर्यावरण की अनदेखी भविष्य में क्षेत्र के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकती है। यदि समय रहते अनियंत्रित निर्माण, पेड़ कटान और प्राकृतिक जल स्रोतों से छेड़छाड़ पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया तो आने वाले समय में भूमि कटाव, भूस्खलन और बरसाती आपदाओं का खतरा और बढ़ सकता है। कसौली की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरण को बचाने के लिए प्रशासन को तत्काल प्रभाव से ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।