दुद्धी (सोनभद्र)। स्थानीय तहसील परिसर में आयोजित ऐतिहासिक श्रीरामलीला के 12वें दिन सोमवार को प्रभु श्रीराम और माता सीता के विवाह प्रसंग का मंचन किया गया। विवाह की रस्मों और माता सीता की विदाई के दृश्य ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। बारात में आए अतिथियों और श्रद्धालुओं को पूड़ी-हलवे का भोग लगाकर प्रसाद वितरित किया गया।
लीला में विवाह कथा को आगे बढ़ाते हुए दिखाया गया कि शिवधनुष भंग के बाद राजा जनक ने अयोध्या में राजा दशरथ को विवाह का संदेश भेजा। इसके बाद राजा दशरथ गुरुजनों और परिजनों के साथ भव्य बारात लेकर जनकपुर पहुंचे। जनकपुरवासियों ने बारात का स्वागत सत्कार किया और पूरे नगर में उत्सव का माहौल छा गया।
विवाह मंडप में वैदिक मंत्रोच्चार और मंगलगीतों के बीच विवाह की रस्में संपन्न हुईं। राजा जनक ने विधि विधान से कन्यादान किया और रघुकुल नंदन श्रीराम व जनकपुर की नंदनी माता सीता का विवाह हुआ। लीला में चारों भाइयों के विवाह प्रसंग का भी उल्लेख किया गया। विवाह के बाद विदाई की घड़ी आई तो राजा जनक और माता सुनयना सहित जनकपुरवासी भावुक हो उठे। माता सीता की विदाई का दृश्य देखकर दर्शकों की आंखें भी नम हो गईं।
श्रीरामलीला कमेटी के पदाधिकारियों ने बताया कि अगले दिन 13वें दिन राम वनवास की लीला का मंचन किया जाएगा। आयोजन में प्रबंधक कमलेश सिंह ‘कमल’, अध्यक्ष कन्हैयालाल अग्रहरि, महामंत्री सुरेंद्र गुप्ता और कोषाध्यक्ष आलोक अग्रहरि का विशेष योगदान रहा।
इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के प्रखंड अध्यक्ष संदीप गुप्ता, विष्णु अग्रहरि, मनीष जायसवाल, सोनू जायसवाल, अनिल हलवाई, विकास मद्धेशिया, पीयूष कसेरा और सुरेश तिवारी सहित बड़ी संख्या में नगरवासी व श्रद्धालु मौजूद रहे। लीला का संचालन और निर्देशन महंत देवेंद्र मिश्रा तथा व्यास विवेकानंद मिश्रा कर रहे हैं।