बहराइच। सरबंसदानी श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के चार साहिबजादों व माता गुजरी की शहादत को याद करते हुए गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में सफर-ऐ- शहादत के नाम से यह सप्ताह मनाया जा रहा है।
गुरुद्वारा अध्यक्ष मंदीप सिंह वालिया ने बताया की मुगल सल्तनत के जुल्म और अन्याय के खिलाफ देश और कौम की रक्षा के लिए गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की। गुरु गोविंद सिंह जी के दो साहबजादे अजीत सिंह और जुझार सिंह चमकौर के युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए और दो साहबजादे जोरावर सिंह और फतेह सिंह माता गुजरी के साथ कैद कर लिया गया था दोनों साहबजादों को जिंदा दीवार में चुनवा दिया गया और माता गुजरी ने भी अपने प्राण त्याग दिए।इस तरह श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज ने अपना सरबंश देश और कौम की रक्षा के लिए न्योछावर कर दिया।
बहराइच जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र सफर-ऐ-शहादत के मौके पर गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा पहुंचे जहां उन्होंने श्री गुरुग्रंथ साहब जी को माथा टेका और श्रद्धालुओं के बीच लंगर सेवा की उनके साथ जिला कृषि अधिकारी सतीश पांडेय, बेसिक शिक्षा अधिकारी ए आर तिवारी, गन्ना अधिकारी शैलेश कुमार ने भी माथा टेका।
लखीमपुर से आए रागी जत्था दिलबाग सिंह जी के “न उडीकी दादीये,असी मुड़ नही औना” कीर्तन और कथा से संगत की आंखें भर आई और हेडग्रंथि ज्ञानी विक्रम सिंह जी ने सरबत के भले की अरदास की।
इस अवसर पर संरक्षक मंजीत सिंह शम्पी, महामंत्री भूपेंद्र सिंह वालिया, उपाध्यक्ष परमजीत सिंह, जगजीत सिंह, जगनंदन सिंह, देवेंद्र सिंह बेदी, मीडिया प्रभारी परविंदर सिंह सम्मी, दशमिन्दर पाल सिंह, अर्शदीप,राजेंद्र कौर, बलजीत कौर,गुरबख्श कौर, इकबाल सिंह, गुरबख्श कौर ,गुरजीत कौर,हरजीत कौर शामिल हुए।
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Jitendar bahadur
ब्यूरो चीफ बहराइच