बदहाल विद्युत व्यवस्था एवम रासायनिक उर्वरकों की किल्लत के बीच रबी फसलों की बोनी में आई भारी गिरावट

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*बदहाल विद्युत व्यवस्था एवम रासायनिक उर्वरकों की किल्लत के बीच रबी फसलों की बोनी में आई भारी गिरावट*

 

शहडोल ,जिले में कमर तोड मंहगाई के बीच एक बेहद निराशाजनक खबर सामने आई है सूत्रों की माने तो गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष रबी फसलों की बोनी में 75 फीसद की कमी देखी जा रही है किसानों की माने तो कम बोनी का प्रमुख कारण रासायनिक उर्वरकों की भारी किल्लत एवम अघोषित विद्युत कटौती सबसे बड़ा कारण है क्षेत्र के कृषकों ने बताया कि क्षेत्र में विगत 6 माह से कृषि योग्य विद्युत आपूर्ति में भारी कटौती की जा रही जिस कारण खरीफ की फसल भी सिंचाई के अभाव में काफी प्रभावित हुई जिस कारण अब रबी फसलों के लिए कृषकों ने बोनी का क्षेत्र फल ही कम कर दिया क्षेत्र में इस वर्ष गत वर्ष की अपेक्षा 25 फीसदी क्षेत्र फल में ही बोनी कर रहे हैं जो शासन प्रशासन के लिए बेहद शर्मनाक है जहा केंद्र से लेकर राज्य सरकार भी बड़े बड़े मंचो से किसानों के कल्याण की योजनाएं बनाने के घोसणा करते हैं ,लेकिन वही योजनाएं धरातल में आते आते दम तोड देती है ,जिससे आज देश का अन्न दाता बदहाल जीवन बसर करने पर मजबूर है मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने विगत जुलाई माह में एक तुगलकी फरमान जारी करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत कटौती का आदेश जारी किया को वर्तमान में भी प्रभावशील है दिन में महज दो घंटे ही सिंचाई योग्य विद्युत आपूर्ति होती है जिससे रबी फसलों की सिंचाई करना संभव ही नहीं है

लगातार 3 बार से कृषि कर्मण अवार्ड मिलने के बाद भी राज्य सरकार ने नही ली अन्न दाता की सुध ,एक तरफ जहा देश में कमर तोड मंहगाई ने आम जन जीवन का जीना दुभर कर रखा है वही रबी फसलों की बोनी क्षेत्र फल में कमी सिस्टम की लचर व्यवस्था जाहिर होती है

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बड़े बड़े अफसरों मंत्रियों के बंगलो में दिन रात निर्बाध रूप से विद्युत आपूर्ति की जाती है लेकिन खुद भूखा सोकर देश को दो वक्त की रोटी मुहैया कराने वाला अन्न दाता आज अपने सूखे हुए एवम खाली पड़े खेत देखकर आंसू बहा रहा है अन्न दाता के इस दारुण्य दुख को न तो अधिकारियों से कोई सरोकार है न ही राज नेताओ को तभी तो कृषि प्रधान देश होने के बावजूद असमय कई अन्न दाता काल के गाल में समा जाते हैं ,ये लचर व्यवस्था एवम बदहाल सिस्टम का नतीजा है ,

 

शहडोल से ब्यूरो रिपोर्ट बीके तिवारी

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