(कमलेश पोटे बैतूल)बैतूल जिले में अदने से लेकर आला अधिकारी अंगद के पैर की तरह जमे,कई तो 15-20 वर्षों से घूम रहे ज़िले में,स�
बैतूल जिले में अदने से लेकर आला अधिकारी अंगद के पैर की तरह जमे,कई तो 15-20 वर्षों से घूम रहे ज़िले में,स्थानांतरण नीति पर उठ रहे सवाल,जिले में प्रशासनिक व्यवस्था सुधारने बदलाव की जरूरत
बैतूल। जहां एक ओर राज्य शासन द्वारा थोक में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के तबादले किए जा रहे हैं। वहीं बैतूल जिला मुख्यालय स्थित संयुक्त कलेक्ट्रेट सहित अन्य विभागों और दसों ब्लॉक मुख्यालयों के लगभग सभी प्रमुख कार्यालयों में पदस्थ शासकीय कर्मचारी एवं अधिकारी कई वर्षों से अंगद के पैर की तरह इन कार्यालयों में जमे हुए हैं। ब्लॉक मुख्यालय के शासकीय कार्यालयों में कर्मचारियों से लेकर ए ग्रेड के अधिकारी तक सालों से एक ही कार्यालयों में पदस्थ हैं जिसमें कई लेखापाल तो एक ही जगह अपनी पूरी नौकरी का समय काट ले रहे। ये स्थिति विकासखंड स्तर से लेकर जिला मुख्यालय तक मे बनी हुई है। हालात ये है कि वर्षो से एक ही कुर्सी पर जमे ये अधिकारी और कर्मचारी शासन के नियमो को ठेंगा दिखाते हुए अपना उल्लू सीधा कर रहे है। देखना है कि इस बार शासन की तबादला नीति के नियमों के दायरे में ये अधिकारी और कर्मचारी आ पाते है या फिर लेनदेन और पंहुच का रास्ता अपना कर अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब हो जाते है।
इन कार्यालयों में वर्षों से पदस्थ है अधिकारी कर्मचारी
जिला मुख्यालय पर स्थित संयुक्त कलेक्ट्रेट सहित जनपद पंचायत, बीआरसी, उद्यानिकी विभाग, शिक्षा विभाग,जनजातीय कार्य विभाग,पीएचई कार्यालय,तहसील कार्यालय, कृषि विभाग, महिला बाल विकास विभाग,आरईएस,पीडब्ल्यूडी,स्वास्थ्य आदि विभागों में महिला एवं पुरुष कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों तक पिछले कई सालों से पदस्थ होकर अपनी राजनीतिक पहुंच का परिचय दे रहे हैं। जो अपनी राजनैतिक पकड़ के चलते वर्षों से पदस्थ होकर जमकर चांदी काट रहे हैं। जिला प्रशासन को ऐसे कर्मचारियों एवं अधिकारियों को सूचीबद्ध कर हटाया जाना चाहिए।
ये अधिकारी लंबे समय से मुख्यालय पर जमे है
बैतूल जिले में डीपीसी के पद पर पदस्थ रहे संजीव श्रीवास्तव,शंकर सिंह चौहान लिपिक,हरिदास चौरासे खादी ग्रामोद्योग जिला पंचायत,जीआर कोषे लेखपाल डीपीसी कार्यालय,भीमराव गायकवाड़ बीआरसी कार्यालय बैतूल,जनजातीय कार्य विभाग के लेखपाल राजू सोनारे,अशोक गायकी,कैलाश यादव,जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में रविकिरण तायवाड़े,शेषराव डोंगरे,कलक्ट्रेट कार्यालय में मनीष उदासी,राजेश जैन,पी बारंगे,अशोक काले,के के हारोड़े,राजेश मालवीय,युनुस खान,सुरेश जैन,रमेश साबले,आर के तिवारी,डी आर पंवार सहित अन्य विभागों के दर्जनों अधिकारी कर्मचारी अपनी मजबूत राजनैतिक पकड़ के चलते मुख्यालय पर जमे हुए हैं। इसी तरह नगरपालिका के भी कुछ उपयंत्री और एई का भी बैतूल से काफी मोह है। इनका ट्रांसफर जिले के बाहर होने पर ये पूरा जुगाड़ लगाकर वापस जिले में आ जाते है।
इनका कहना है:-
भाजपा की कथनी और करनी में बड़ा फर्क है। यह नियम बनाते तो जरूर है लेकिन पालन कुछ और करते है। विभागों में जमे लोगो को कार्यक्षमता के अनूरूप कार्य आवंटन होना चाहिए और किसी के साथ अन्याय नही होना चाहिए।
सुनील गुड्डू शर्मा
जिलाध्यक्ष, कांग्रेस बैतूल
ट्रांसफर के लिये शासकीय नीति बनी हुई है। नीति का पालन करते हुए ही ट्रांसफर किये जायेंगे।
आदित्य बबला शुक्ला
जिलाध्यक्ष,भाजपा बैतूल
बैतूल जिला आदिवासी बाहुल्य होने की वजह से यहां पर अधिकारियों और कर्मचारियों की मनमानी आसानी से चल जाती है। अपने काम निपटाने के लिए आम लोगों को कई चक्कर कार्यालयों के काटने पड़ते है। जब तक ये सालों से जमे हुए अधिकारी,कर्मचारी हटाए नही जाएंगे तब तक व्यवस्था नही सुधरेंगी। सरकार किसी की भी हो ये लोग जुगाड़ लगाकर एक जगह जमे रहते है। प्रशासन को सख्ती से इन्हें हटाना चाहिए।
हेमंत सरियाम
अध्यक्ष गोंडवाना गणतंत्र पार्टी,बैतूल
नोट-यह जानकारी हमारे प्रशासनिक सूत्रों से मिली है जिसमें कुछ बदलाव हो सकतें है