रिपोर्टर राजेंद्र धाकड़
नर्मदापुरम के युवा लेखक: देव कुशराम आज के समय में रासायनिक खेती से खेत की उर्वरता कम होती जा रही है। ऐसे में जैविक खेती किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर उभरी है। इसमें खाद, कीटनाशक आदि सभी प्राकृतिक तरीकों से दिए जाते हैं। गोबर, वर्मी कम्पोस्ट, नीम खली आदि का उपयोग मिट्टी को ज़हरीले तत्वों से मुक्त करता है।
जैविक खेती से उत्पादन में थोड़ी कमी हो सकती है, लेकिन बाज़ार में इसकी क़ीमत अधिक मिलती है। साथ ही मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है, जिससे लंबे समय तक खेती संभव हो पाती है। ऐसे उत्पादों की मांग देश-विदेश दोनों में है।
मैंने स्वयं एक वर्ष तक खेतों के सर्वेक्षण के दौरान देखा कि जो किसान जैविक खेती कर रहे हैं, उन्हें कम लागत में बेहतर लाभ मिल रहा है। ऐसे में जैविक खेती को प्रोत्साहित करना समय की मांग है।
नर्मदापुरम के युवा लेखक: देव कुशराम, कृषि स्नातक (B.Sc. Agriculture), नर्मदापुरम, म.प्र.