बेल्थरा रोड, बलिया दशकों से सूखी नहरें और किसानों का दर्द
संवाददाता भीमपुरा सुधीर कुमार ठाकुर

बलिया के बेल्थरा रोड क्षेत्र में किसान पिछले दो दशकों से सूखे की दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ जहां प्राकृतिक आपदा के रूप में सूखा हर साल चुनौती बन कर खड़ा होता है, वहीं दूसरी तरफ सिंचाई का महत्वपूर्ण साधन मानी जाने वाली नहरें खुद बदहाली का शिकार हैं। यह स्थिति इतनी विकट है कि कई गांवों में अभी तक 10% धान की रोपाई भी नहीं हो पाई है, जबकि नहरों की सिल्ट सफाई के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
तुर्तीपार सहायक नहर परियोजना की विफलता
बेल्थरा रोड क्षेत्र के लिए तुर्तीपार में एक सहायक नहर परियोजना मौजूद है, जिसका उद्देश्य किसानों को पानी उपलब्ध कराना है। विडंबना यह है कि यह परियोजना जिस इलाके से गुजरती है, उसी इलाके के नहर के रजवाहों (छोटी नहरों) में पानी का नामों-निशान नहीं है। स्थानीय किसानों का कहना है कि नहरों की स्थिति इतनी खराब है कि वे किसानों की प्यास बुझाने की बजाय, अधिकारियों और ठेकेदारों के लिए साल में दो बार “सिल्ट सफाई” के नाम पर मोटी कमाई का जरिया बन गई हैं।
जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता और किसानों का आक्रोश
क्षेत्र के किसानों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि यह समस्या सीधे तौर पर जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता का परिणाम है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि जनप्रतिनिधि इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान दें और उचित कार्रवाई करें, तो किसानों को इस दुष्चक्र से मुक्ति मिल सकती है। सूखे की मार झेल रहे किसानों के लिए यह समझना मुश्किल है कि उत्तर प्रदेश सरकार की किसानों के प्रति “वफादारी” का क्या अर्थ है, जब उनके मूलभूत सिंचाई साधन ही बदहाली का शिकार हैं।
समाधान की दरकार
इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। केवल कागजों पर सिल्ट सफाई दिखाने के बजाय, जमीन पर वास्तविक कार्य होना चाहिए। सरकार और स्थानीय प्रशासन को मिलकर एक ठोस योजना बनानी होगी ताकि तुर्तीपार सहायक नहर परियोजना का लाभ बेल्थरा रोड के किसानों तक पहुंच सके और वे सूखे की त्रासदी से कुछ हद तक बच सकें। किसानों की बदहाली को दूर करने के लिए नहरों का जीर्णोद्धार और उनमें पानी की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करना अब समय की मांग है।चखानीचख, भीटा ,रामगढ़, भिटौरा, भुवारी जिऊतपुरा,गंगऊपुर,भदहर खडेजी आदि गांवों की लगभग सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि के तरफ़ समाजसेवी विनोद मानव ने सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया है।बेल्थरा रोड, बलिया: दशकों से सूखी नहरें और किसानों का दर्द
बलिया के बेल्थरा रोड क्षेत्र में किसान पिछले दो दशकों से सूखे की दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ जहां प्राकृतिक आपदा के रूप में सूखा हर साल चुनौती बन कर खड़ा होता है, वहीं दूसरी तरफ सिंचाई का महत्वपूर्ण साधन मानी जाने वाली नहरें खुद बदहाली का शिकार हैं। यह स्थिति इतनी विकट है कि कई गांवों में अभी तक 10% धान की रोपाई भी नहीं हो पाई है, जबकि नहरों की सिल्ट सफाई के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
तुर्तीपार सहायक नहर परियोजना की विफलता
बेल्थरा रोड क्षेत्र के लिए तुर्तीपार में एक सहायक नहर परियोजना मौजूद है, जिसका उद्देश्य किसानों को पानी उपलब्ध कराना है। विडंबना यह है कि यह परियोजना जिस इलाके से गुजरती है, उसी इलाके के नहर के रजवाहों (छोटी नहरों) में पानी का नामों-निशान नहीं है। स्थानीय किसानों का कहना है कि नहरों की स्थिति इतनी खराब है कि वे किसानों की प्यास बुझाने की बजाय, अधिकारियों और ठेकेदारों के लिए साल में दो बार “सिल्ट सफाई” के नाम पर मोटी कमाई का जरिया बन गई हैं।
जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता और किसानों का आक्रोश
क्षेत्र के किसानों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि यह समस्या सीधे तौर पर जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता का परिणाम है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि जनप्रतिनिधि इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान दें और उचित कार्रवाई करें, तो किसानों को इस दुष्चक्र से मुक्ति मिल सकती है। सूखे की मार झेल रहे किसानों के लिए यह समझना मुश्किल है कि उत्तर प्रदेश सरकार की किसानों के प्रति “वफादारी” का क्या अर्थ है, जब उनके मूलभूत सिंचाई साधन ही बदहाली का शिकार हैं।
समाधान की दरकार
इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। केवल कागजों पर सिल्ट सफाई दिखाने के बजाय, जमीन पर वास्तविक कार्य होना चाहिए। सरकार और स्थानीय प्रशासन को मिलकर एक ठोस योजना बनानी होगी ताकि तुर्तीपार सहायक नहर परियोजना का लाभ बेल्थरा रोड के किसानों तक पहुंच सके और वे सूखे की त्रासदी से कुछ हद तक बच सकें। किसानों की बदहाली को दूर करने के लिए नहरों का जीर्णोद्धार और उनमें पानी की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करना अब समय की मांग है।चखानीचख, भीटा ,रामगढ़, भिटौरा, भुवारी जिऊतपुरा,गंगऊपुर,भदहर खडेजी आदि गांवों की लगभग सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि के तरफ़ समाजसेवी विनोद मानव ने सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया है।