सिरोही
खुशियों के बीच मायूसी — पिण्डवाड़ा क्षेत्रमें काली दिवाली,
काली दिवाली में डूबे पिण्डवाड़ा क्षेत्र के गांव — प्रस्तावित खनन परियोजना से टूटी उम्मीदें, बुझी मुस्कानें
खनन परियोजना के विरोध में ग्रामीणों ने नहीं मनाई दिवाली, हाथों में काले झंडे और आँखों में आंसू के साथ सवाल — “हमारा कसूर क्या है..?”
सिरोही।
जब पूरा देश दीपावली की रौशनी में डूबा हुआ है, हर घर में दीप जले हैं, खुशियाँ मनाई जा रही हैं — वहीं राजस्थान के सिरोही जिले की पिण्डवाड़ा तहसील के गांवों में मायूसी और शोक का माहौल पसरा हुआ है।
वाटेरा, भीमाना, भारजा और रोहिड़ा ग्राम पंचायतों के ग्रामीण इस बार दिवाली नहीं मना रहे, बल्कि “काली दिवाली” के रूप में विरोध जता रहे हैं।
लोगों के हाथों में काले झंडे हैं, कई घरों में मिठाइयाँ नहीं बंटी, और दीपों की जगह आँखों से आंसू बह रहे हैं। ग्रामीणों की सहमी आवाज में एक ही सवाल गूंज रहा है —
“हमारा कसूर क्या है? क्यों हमें एक महीने से सड़कों पर उतरकर विरोध करना पड़ रहा है, सरकार इस खनन परियोजना को निरस्त क्यों नही कर रहीं, आखिर जिम्मेदार सब बेखबर क्यों..?”
दरअसल, पिण्डवाड़ा क्षेत्र में कमलेश मेटा कास्ट नामक एक निजी कंपनी को करीब 800 हेक्टेयर भूमि चुना खनन परियोजना के लिए प्रस्तावित की गई है। इसी के विरोध में क्षेत्र के लोग पिछले एक महीने से आंदोलनरत हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वे इस परियोजना के सख्त खिलाफ हैं क्योंकि इससे गांव की जमीन, जल स्रोत और जंगल नष्ट हो जाएंगे। बावजूद इसके, उनकी आवाज को सरकार और प्रशासन ने अब तक नहीं सुना।
जहाँ एक ओर प्रदेश के नेता और अधिकारी दीवाली के जश्न में मशगूल हैं, वहीं दूसरी ओर इन गांवों में निकट भविष्य को लेकर चिंता, डर और आक्रोश की लहर है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अब तक कई ज्ञापन दिए, नेताओं और जनप्रतिनिधियों से मुलाकातें कीं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिला।
एक ग्रामीण महिला की आँखों में आँसू थे, वह बोली —
“हमारे बच्चों के भविष्य की बात है, खेत-खलिहान चले जाएंगे, हम कहाँ जाएंगे? हमें तो बस यही जानना है, हमारी दिवाली काली क्यों की गई और इसका जिम्मेदार फिर कौन?”
आज जब चारों ओर रोशनी बिखरी है, सिरोही के इन गांवों में अंधेरे ने घर कर लिया है।
यह अंधेरा केवल दीपों का नहीं, बल्कि सरकार की संवेदनहीनता का प्रतीक बन गया है मिलीं जानकारी अनुसार ईडीयन टीवी न्यूज चैनल जालोर संवादाता जबरसिंह राज़ पुरोहित थांवला