राज्यपाल‑सह‑झारखंड राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने आज विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग के 10वें दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों व शोधार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दी।
हजारीबाग: समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “दीक्षांत केवल उपाधि प्रदान करने का औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह विद्यार्थियों के परिश्रम, अनुशासन, धैर्य और निरंतर साधना का प्रतीक है। यह जीवन के एक महत्वपूर्ण अध्याय की पूर्णता और नए अध्याय की शुरुआत है।”
राज्यपाल महोदय ने जोर दिया कि विश्वविद्यालय से प्राप्त ज्ञान, मूल्यबोध और संस्कारों को अब समाज व राष्ट्र के व्यापक हित में उपयोग करना प्रत्येक छात्र का दायित्व है। उन्होंने विनोबा भावे के विचारों को याद करते हुए कहा कि इस संस्था का नाम उनके भू‑दान यज्ञ और सामाजिक सुधार के आदर्शों से प्रेरित है।
उन्होंने छात्रों से आह्वान किया, “‘विकसित भारत @2047’ तथा ‘आत्मनिर्भर एवं सशक्त भारत’ के निर्माण में ईमानदारी, परिश्रम और नैतिकता के साथ योगदान दें। शिक्षा का उद्देश्य केवल आजीविका अर्जन नहीं, बल्कि संवेदनशील, जिम्मेदार और कर्तव्यनिष्ठ नागरिक बनाना है।”
राज्यपाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति‑2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नीति शिक्षा को समावेशी, मूल्यपरक और समाजोपयोगी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने प्लेसमेंट सेंटर को अधिक प्रभावी बनाने, शोध एवं सामाजिक सरोकारों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।
समापन में उन्होंने कहा, “आपकी पहचान डिग्री से नहीं, बल्कि आपके कर्मों से बनती है। सफलता और असफलता दोनों जीवन के स्वाभाविक पक्ष हैं; जो असफलता से सीखकर आगे बढ़ता है, वही स्थायी सफलता प्राप्त करता है।”
समारोह के प्रारम्भ में राज्यपाल महोदय ने विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित संत विनोबा भावे की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धा व्यक्त की।
> नरेश सोनी:
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