वाराणसी से प्रवीण मिश्रा की रिपोर्ट।
इंडियन टीवी न्यूज नैशनल।
जनपद बलिया के विधानसभा रसड़ा, विकासखंड चिलकहर स्थित गोविंद साहब बाबा प्रांगण, गौरा में चक्रवर्ती सम्राट, राष्ट्रवीर महाराजा सुहेलदेव राजभर जी की 1017वीं जयंती के पावन अवसर पर आयोजित समारोह ने इतिहास, स्वाभिमान और चेतना को एक मंच पर जोड़ दिया।
इस ऐतिहासिक अवसर पर ऊर्जावान एवं प्रेरक उपस्थिति ने पूरे वातावरण को राष्ट्रभक्ति और सामाजिक चेतना से भर दिया।जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि गोविंद साहब बाबा प्रांगण, गौरा में स्थापित महाराजा सुहेलदेव जी की भव्य प्रतिमा केवल पत्थर की आकृति नहीं, बल्कि शोषित-वंचित समाज के आत्मसम्मान, संघर्ष और विजय का अमर प्रतीक है।
यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देती है कि जो समाज अपने इतिहास को पहचान लेता है, वही अपना भविष्य गढ़ता है। कहा कि महाराजा सुहेलदेव जी ने तलवार से नहीं, बल्कि साहस, संगठन और संकल्प से विदेशी आक्रांताओं को पराजित किया। उन्होंने समाज को यह सिखाया कि एकता में ही शक्ति है और स्वाभिमान ही सबसे बड़ा शस्त्र है।
आह्वान किया कि आज का युवा महाराजा सुहेलदेव जी के विचारों को जीवन में उतारकर शिक्षा, संगठन और सामाजिक न्याय के मार्ग पर आगे बढ़े, ताकि एक समतामूलक और सशक्त भारत का निर्माण हो सके।
इस विशाल जनसमागम ने यह सिद्ध कर दिया कि महाराजा सुहेलदेव जी केवल इतिहास के पन्नों में नहीं, बल्कि जन-जन के हृदय में जीवित है।।