रिपोर्ट अजय सिंह तोमर
पोरसा|शेरा गुर्जर फतेहाबाद एवं हरेंद्र सिंह गुर्जर खेरागढ आगरा के बीच आने वाले शनिवार या रविवार को होगी अंतिम तीन कुश्ती का निर्णय नहीं हो सका देर रात तक चलता रहा दंगल, दंगल के बाहर सरोवर परिसर के बाहर एक मेला सा लगा हुआ था इस दंगल को देखने के लिए क्षेत्र एवं अन्य क्षेत्र से लगभग 30000 से अधिक दर्शक देखने के लिए आए पूरी सुरक्षा व्यवस्थाएं पुलिस व ग्राम वासियों ने संभाली
पोरसा ऐतिहासिक दंगल जोटई में आज दोपहर 12:00 बजे से देर रात तक जारी रहा जिसमें सैकड़ों कुश्ती हुई, अंतिम कुश्ती 71000 रूपए की रखी गई थी जो हरेंद्र सिंह गुर्जर रसूलपुर खेरागढ़ आगरा व शेरा पहलवान फतेहाबाद के बीच निर्णय न होने के कारण आने वाले शनिवार या रविवार को पुनः कुश्ती होगी,,, इसी तरह 21000 की कुश्ती भवानी पहलवान सिंहपुरा व कौशल पहलवान ग्वालियर के बीच बराबर रही तथा 11000 की कुश्ती जीतू पहलवान ग्वालियर पारथ पहलवान बराह के बीच बराबर रही ,,, एवं 7100 वाली कुश्ती राकेश पहलवान ग्वालियर व जयदीप शेरपुर के बीच बराबर रही,,
सुबह बेटासों पर कुश्ती शुरू हुई बताशे पर 45 कुश्ती हुई,, ₹10 की तीस कुर्सियां हुई,,,₹20 वाली 30 कुश्ती हुई,,, ₹50 की 25 कुश्ती हुई ,,,₹100 की 22 कुश्ती हुई ,,,₹200 की 26 कुश्ती हुई,,, ₹300 की 12 कुश्ती हुई ,,,₹500 पर 30 कुश्ती हुई ,,,,₹11000 की 34 कुश्ती ,,,1500 रुपए की 10 कुश्ती,,,2100 की 38 कुश्तीयां हुई,,,3100 की 28 कुश्ती,,,, 4100 की चार कुश्ती ,,,,5100 की 8 कुश्ती हुई,,, जंगल में रेफरी के रूप में रामकुमार शर्मा गुड़ा महेश सिंह तोमर पहलवान रणजीत सिंह तोमर बृजपाल राज सिंह तोमर शेर सिंह तोमर सोनू सिंह भदौरिया आदि ने अगड़े में एक साथ चार-चार कुश्तीयां कराई,,,,,, सभी सभी विजेताओं को कमेटी के द्वारा पुरस्कार प्रदान किए गए,,,, फाइनल कुश्ती का निर्णय आने वाले शनिवार या रविवार को पुनः कुश्ती होने के बाद किया जाएगा तब फाइनल पुरस्कार का वितरण होगा, छोटे बच्चे जो बतासे व दस रुपए पर कुश्ती लड़ते हैं वह अखाड़े में प्रतिदिन करते हैं अभ्यास,
ग्राम जोटई में चौधरी परिवार के द्वारा आज से एक सैकड़ा से भी अधिक वर्ष पूर्व दंगल का आयोजन किया गया था जो आज तक लगातार चल रहा है, इस दंगल की एक विशेषता है कि कुश्ती विजेता को 80% तथा हारे हुए को 20% इनाम दी जाती है यहां पर आज से लगभग 10 वर्ष पूर्व चांदी की गुर्ज (हनुमान जी की मूर्ति)बनाई गई थी जो आज भी यहां मौजूद है ,,,इस गुर्ज जो चांदी की बनी हुई है उसकी एक शर्त है कि लगातार 3 वर्ष तक अंतिम झंडी उठाने वाले पहलवान को तीसरी साल दी जाएगी अभी तक यह गुर्ज किसी ने नहीं उठा पाई है.
इस दंगल में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, महाराष्ट्र तथा सेना के पहलवान भी आकर की भाग लीया, यह दंगल गांव में स्थित सरोवर परिसर में लगता है इस समाचार पत्र के द्वारा बराबर मांग करने के बाद पूर्व में रहे सांसद अशोक अर्गल के द्वारा तालाब में अखाड़ा अपनी सांसद निधि से बनवाया गया था जिस पर आज कुश्ती होती हैं शासन की ओर से इस दंगल को कोई भी आर्थिक मदद नहीं दी जाती है सिर्फ ग्रामवासी आपस में सहयोग करके उक्त दंगल का आयोजन करते हैं शासन को चाहिए कि ऐसे राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त दंगल में जो प्रतिभाएं भारती/ उभर के आगे आती हैं उनका ध्यान रखते हुए दंगल के आयोजन समिति को आर्थिक मदद करनी चाहिए. उक्त दंगल की व्यवस्था सभी ग्रामवासी देखी हैं.