छतरपुर // छतरपुर में जय किसान संगठन द्वारा आयोजित किसान महापंचायत में सैकड़ों गांवों के हजारों किसानों का जनसैलाब उमड़ा। नवरात्रि पर्व के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों ने कार्यक्रम में भाग लिया, जिसमें महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से अधिक रही। कई महिलाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ कार्यक्रम में पहुंचीं।
महापंचायत में प्रभावित गांवों के साथ-साथ अन्य गांवों के लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। उन्होंने किसानों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया और संघर्ष में साथ देने का संकल्प लिया।
मंच से सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने आक्रामक तेवर दिखाते हुए कहा कि अब “याचना नहीं, अब रण होगा।” उन्होंने कहा कि यह लड़ाई अब केवल जमीन की नहीं, बल्कि किसानों के सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई बन चुकी है।
कार्यक्रम के बाद किसान आक्रोश रैली श्री हरी वाटिका से प्रारंभ होकर देरी रोड तिगड्डा, बिजावर नाका, छत्रसाल चौराहा होते हुए पुलिस अधीक्षक कार्यालय पंहुचा। रैली के दौरान किसानों ने प्रशासन के खिलाफ जोरदार आक्रोश व्यक्त किया और नारे लगाए—जब-जब किसान बोला है, राज सिंहासन डोला है, किसानों के साथ अन्याय नहीं सहेंगे,
आदिवासियों के साथ अन्याय नहीं सहेंगे, जमीन ली, जान मत लो, जिला प्रशासन की तानाशाही नहीं चलेगी।
रैली के दौरान माहौल पूरी तरह आक्रोशपूर्ण रहा और किसानों ने प्रशासन के खिलाफ खुलकर विरोध दर्ज कराया।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर एडिशनल एसपी आदित्य पटेल को प्रधानमंत्री के नाम पांच सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया, जिसे अमित भटनागर द्वारा पढ़कर सुनाया गया।
ज्ञापन में केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय, रुन्झ एवं नैगुवा सिंचाई परियोजनाओं के कारण हो रहे विस्थापन, प्रशासनिक दमन और भू अधिकरण कानून 2013 के उल्लंघन का विस्तार से उल्लेख किया गया।
ज्ञापन में कहा गया कि बिना मुआवजा दिए किसानों की फसलें उजाड़ी जा रही हैं, मकान गिराए जा रहे हैं और भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन से जुड़े कानूनों का पालन नहीं किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री से की गई प्रमुख मांगों में— उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, किसानों और आदिवासियों के जबरन विस्थापन पर रोक, भू अधिकरण कानून 2013 का पूर्ण पालन, गांव के बदले गांव और विशेष रूप से महिलाओं के लिए पुनर्वास पैकेज शामिल हैं।
महापंचायत में कई किसानों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े, जिससे विस्थापन का दर्द साफ दिखाई दिया।
इस दौरान अमित भटनागर ने पुलिस व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक तरफ पुलिस महिलाओं पर लाठीचार्ज करती है, जबकि दूसरी ओर सट्टा, जुआ और रेत माफियाओं से जुड़े लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। इससे जनता का पुलिस पर विश्वास कम हो रहा है।
ये रहे शामिल
जय किसान संगठन ने प्रधानमंत्री से इस पर तत्काल संज्ञान लेकर सुधार की मांग की, ताकि पुलिस की छवि निष्पक्ष और पारदर्शी बन सके।
कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के साथ मनीष जैन बकस्वाहा, बहादुर आदिवासी, आशीष कुशवाहा, पार्षद दिव्या अहिरवार, राहुल अहिरवार, जितेंद्र यादव मुखर्रा, पार्षद रामपाल शर्मा, सरपंच बबलू यादव, सरपंच मज़ली बहू जग्गू आदिवासी, पवन पटेल, शकुंतला आदिवासी, हरि बाई अहिरवार, रामसखी आदिवासी, पाना आदिवासी, सावित्री आदिवासी, रामकली प्रजापति, चंदा बंसल, कुसुम रानी, महक रानी, अशोक रानी, प्रेम रानी आदिवासी, दीपा अहिरवार, फूला आदिवासी, मालती आदिवासी, कपूरीसाधना आदिवासी, गुड़िया नागर, राजा आदिवासी, सुमन प्रजापति, भगवती अहिरवार, दीपा अहिरवार, सोमवती अहिरवार, पूजा अहिरवार, हल्की बहू, लक्ष्मी अहिरवार, भूदर आदिवासी, राजेंद्र प्रसाद असाटी, राहुल बरमशला, ग्यासी रैकवार, निनजी पाल, नथुआ रैकवार, पवन पटेल, अरविंद प्रजापति, अजय पटेल, गोविंद सिंह राजपूत, जय प्रजापति, ओ. पी. पटेल, गया पटेल, रामप्रसाद पटेल, भगतराम तिवारी, राम चरन अहिरवार, अभय, अहिरवार, तुलसीदास पटेल, बबलू कुशवाह,बहादुर आदिवासी, राहुल अहिरवार, मंगल यादव, कमलेश यादव, पप्पू आदिवासी,मातादीन, सहित बड़ी संख्या में आदिवासी, किसान और महिलाएं सम्मिलित रही।
पन्ना से संवाददाता मानस अवस्थी रिपोर्ट