रिपोर्टर : विजय भवानी
जयपुर|आमेर के ऐतिहासिक पर्यटन स्थल Maota Lake की नगर निगम पार्किंग में कथित अवैध वसूली का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि Jaipur Municipal Corporation की पार्किंग में टेंडर समाप्त होने के बावजूद बाहरी लोगों से धड़ल्ले से शुल्क वसूला जा रहा है और इस पूरे मामले में RO सतीश जाटव की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कैसे चल रहा है अवैध पार्किंग का खेल सूत्रों और मौके से मिली जानकारी के अनुसार पार्किंग का टेंडर खत्म होने के बाद भी शुल्क वसूली जारी है। नगर निगम कर्मचारी केवल दिखावे के लिए खड़े नजर आते हैं।
वास्तविक वसूली कथित रूप से निजी व अन्य विभागों के कर्मचारियों द्वारा की जा रही है।
इस अवैध वसूली से सरकार को हर दिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान होने की आशंका है।
नगर निगम कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल जांच के दौरान सामने आया कि नगर निगम कर्मचारी पार्वती सोनी ने फोन पर बताया कि पार्किंग निगम द्वारा संचालित है, जबकि मौके पर तस्वीर अलग दिखी। मामले में नगर निगम हवामहल जोन उपायुक्त सीमा चौधरी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अन्य विभागों के कर्मचारी भी शामिल?
सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि वन विभाग के सरकारी कर्मचारी राजेन्द्र कुमार नगर निगम पार्किंग में कथित रूप से पर्चियां काटते नजर आए।
जल महल स्थित वन विभाग कार्यालय के श्याम सिंह और उनके पास तैनात संविदा कर्मचारी राजेन्द्र कुमार भी ऑन ड्यूटी रहते हुए पार्किंग में मौजूद बताए जा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है:
क्या अन्य विभागों के कर्मचारी अपनी सरकारी ड्यूटी छोड़कर नगर निगम पार्किंग में वसूली कर सकते हैं? अगर नहीं, तो उन्हें यह अधिकार किसने दिया?
RO सतीश जाटव का विवादित बयान
जब इस पूरे मामले में संपर्क कर जवाब मांगा गया तो कथित तौर पर कहा गया:
“आपको जो छापना है छाप दो, चलता-फिरता रोड है, वहां कोई भी आकर बैठ सकता है।” यह बयान सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है।
क्या नगर निगम पार्किंग में कोई भी व्यक्ति बैठकर शुल्क वसूल सकता है?
क्या यह खुलेआम राजस्व घोटाला नहीं है?
बड़ा राजस्व घोटाला होने की आशंका आमेर मावठा जयपुर का प्रमुख पर्यटन स्थल है।
यहां प्रतिदिन सैकड़ों वाहन पार्क होते हैं।
यदि अवैध वसूली जारी है तो सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान से जुड़ा हो सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल क्या नगर निगम कमिश्नर इस पूरे मामले की जांच करवाएंगे?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?
या फिर अवैध पार्किंग का यह खेल यूं ही चलता रहेगा?
आमेर मावठा पार्किंग का यह मामला अब प्रशासन की जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन गया है।
विजय भवानी
ब्यूरो चीफ जयपुर राजस्थान कि रिपोर्टर