बरेली।
फरीदपुर तहसील में प्रधानमंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार की परतें खुलती जा रही हैं। नगर पालिका परिषद फरीदपुर मे आवास देख रहे एक लिपिक ने खुद स्वीकार किया है कि अपात्र लोगों को पात्र बनाकर आवास दिए गए। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि खुलासे के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
नगर क्षेत्र की महिला शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि वार्ड के कुछ सभासद, पालिका कर्मचारियों, राजस्व लेखपाल और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से यह खेल चल रहा है। मोटी रकम लेकर अपात्रों को योजना का लाभ दिलाया जा रहा है।
शिकायत के अनुसार शासन की गाइडलाइन ताक पर रखकर ऐसे लोगों को पात्र घोषित किया गया जिन्हें योजना का लाभ नहीं मिलना चाहिए था। पैसों के दम पर आवास स्वीकृत हुए और कई मामलों में पहली किस्त के बाद अब दूसरी किस्त भी जारी कराने की तैयारी है।
लिपिक का कबूलनामा, प्रशासन खामोश
इस पूरे फर्जीवाड़े पर नगर पालिका के एक लिपिक ने स्वीकार किया कि अपात्र को पात्र बनाकर आवास दिए गए हैं। हैरानी की बात ये है कि खुलासे के बावजूद आज तक किसी सभासद, कर्मचारी या अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
इधर वास्तविक गरीब, मजदूर, विधवा, दिव्यांग और पात्र परिवार आज भी सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि योजना में गरीबों के हक की खुली नीलामी हो रही है।
शिकायतकर्ता महिलाओं ने उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
SDM बोले- संयुक्त टीम करेगी जांच
फरीदपुर के एसडीएम रामजन्म यादव ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि प्रकरण उनके संज्ञान में है। इसकी जांच के लिए संयुक्त टीम बनाई जाएगी।
उन्होंने साफ किया कि जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित सभासदों और कर्मचारियों के खिलाफ BNS की धोखाधड़ी, सरकारी धन के गबन, आपराधिक षड्यंत्र और भ्रष्टाचार की धाराओं में मुकदमा दर्ज होगा।
इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गिरफ्तारी, संपत्ति की जांच, विभागीय निलंबन, सेवा समाप्ति और अवैध आवासों की रिकवरी भी की जाएगी।
फिलहाल लिपिक के कबूलनामे के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप है। अब देखना है कि गरीबों का हक बेचने वालों पर कार्रवाई कब होती है। सभी के निगाहें अब दोषियों पर होने वाली कार्यवाही पर टिकी है।