शहजाद आलम जिला संवाददाता
सिद्धार्थनगर।
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था के हालात दिन-ब-दिन बदतर होते जा रहे हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में गांवों में घंटों बिजली कटौती होने से आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। कई इलाकों में रात-रात भर बिजली गुल रहने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक दिक्कत छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को झेलनी पड़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रही कटौती के कारण रात में नींद पूरी नहीं हो पा रही है। गर्मी और उमस के चलते लोग घरों से बाहर निकलने को मजबूर हैं। वहीं बिजली न रहने से पानी की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है। किसानों को भी सिंचाई कार्य में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जब ग्रामीण जनता बिजली विभाग के अधिकारियों से शिकायत करती है तो अधिकारी ऊपर से आदेश होने या तकनीकी खराबी का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बचते नजर आते हैं। दूसरी ओर जनप्रतिनिधियों तक भी लोगों की आवाज आसानी से नहीं पहुंच पा रही है। लोगों का आरोप है कि मंत्री जी से संपर्क करने की कोशिश की जाती है तो उनके आवास पर मौजूद कर्मचारी या कंप्यूटर ऑपरेटर यह कहकर फोन काट देते हैं कि “मंत्री जी उपलब्ध नहीं हैं।”
ग्रामीणों के बीच अब यह सवाल चर्चा का विषय बन चुका है कि क्या जनप्रतिनिधि खुद बिना बिजली के कुछ समय भी रह सकते हैं? आम लोगों का कहना है कि जो लोग पूरी सुरक्षा और सुविधाओं के बीच रहते हैं, उन्हें गांवों की असली परेशानियों का अंदाजा नहीं है। जबकि लोकतंत्र में जनता के वोट और भरोसे से ही मंत्री और विधायक चुने जाते हैं।
गांवों में लगातार खराब हो रही बिजली व्यवस्था ने लोगों का धैर्य जवाब देना शुरू कर दिया है। जनता का कहना है कि उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं बल्कि स्थायी समाधान चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने और कटौती पर नियंत्रण के लिए सरकार व बिजली विभाग को जल्द ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि भीषण गर्मी में लोगों को राहत मिल सके।