मयूरभंज (ओडिशा), प्रतिनिधि।
ओडिशा के मयूरभंज जिले के धातिका ब्लॉक अंतर्गत डुमुरिया गांव से एक ऐसी मार्मिक कहानी सामने आई है, जो न केवल लोगों को भावुक कर देती है, बल्कि समाज और प्रशासन के सामने कई गंभीर सवाल भी खड़े करती है। गांव निवासी पूर्णिमा दास के घर जन्मा आठ माह का एक मासूम बच्चा जन्मजात दिव्यांगता से जूझ रहा है।
डुमुरिया गांव के एक साधारण झोपड़ीनुमा घर में रहने वाली पूर्णिमा दास अपने वृद्ध ससुर और दिव्यांग पुत्र के साथ कठिन परिस्थितियों में जीवन व्यतीत कर रही हैं। बच्चे के दोनों हाथ नहीं हैं। उसका एक पैर सामान्य रूप से विकसित हुआ है, जबकि दूसरा पैर काफी छोटा है तथा उसका पंजा भी टेढ़ा है। जन्म से ही गंभीर शारीरिक चुनौतियों का सामना कर रहे इस मासूम के इलाज को लेकर परिवार बेहद चिंतित है।
परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर है। बच्चे के पिता रोजगार की तलाश में हरियाणा के एक होटल में कार्यरत हैं। वहां से मिलने वाली सीमित आय से ही पूरे परिवार का भरण-पोषण हो रहा है। ऐसे में बच्चे के इलाज और विशेष देखभाल का खर्च उठाना परिवार के लिए मुश्किल होता जा रहा है।
डॉक्टरों की सलाह के अनुसार बच्चे के एक वर्ष का होने के बाद उसे बेहतर चिकित्सा और विशेषज्ञ परामर्श के लिए नई दिल्ली स्थित एम्स ले जाना आवश्यक होगा। लेकिन दिल्ली तक यात्रा और उपचार का खर्च जुटा पाना परिवार के लिए लगभग असंभव प्रतीत हो रहा है।
पूर्णिमा दास ने बताया कि उनके सामने बच्चे की परवरिश, वृद्ध ससुर की देखभाल और घर की जिम्मेदारियों का भारी बोझ है। आर्थिक तंगी के कारण वह अपने बेटे के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
यह मामला केवल एक परिवार की परेशानी नहीं, बल्कि उन हजारों गरीब परिवारों की वास्तविकता को दर्शाता है, जो आर्थिक अभाव के कारण अपने बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पाते। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने राज्य एवं केंद्र सरकार से मांग की है कि इस दिव्यांग बच्चे के इलाज, पालन-पोषण और भविष्य की शिक्षा के लिए विशेष सहायता प्रदान की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते उचित सहायता और उपचार उपलब्ध कराया जाए, तो यह मासूम भी भविष्य में समाज की मुख्यधारा से जुड़कर आत्मनिर्भर जीवन जी सकता है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और समाज के संवेदनशील लोगों पर टिकी हैं कि वे इस जरूरतमंद परिवार की सहायता के लिए आगे आएं।
मयूरभंज से प्रदेश प्रमुख हिमांशु प्रहराज