कैलाश आर्य मिडिया रिपोर्टर चिचोली
बैतूल।
जिला चिकित्सालय बैतूल में बीती रात बिजली व्यवस्था ठप होने और मरीजों को भारी परेशानी का सामना करने का मामला सामने आया है। अस्पताल की अव्यवस्थाओं की जानकारी प्रशासन तक पहुंचाने वाले एक पत्रकार को कथित रूप से अस्पताल कर्मचारी द्वारा धमकी दिए जाने का आरोप भी लगा है। मामले को लेकर पत्रकारों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने तथा अस्पताल प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मंगलवार तड़के करीब 1:30 बजे जिला चिकित्सालय बैतूल की बिजली व्यवस्था अचानक ठप हो गई। आरोप है कि करीब दो घंटे तक अस्पताल में बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो सकी, जिससे भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। अंधेरे और उमस के बीच परिजन अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते नजर आए।
बताया जाता है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पत्रकार नितिन अग्रवाल ने इसकी जानकारी कलेक्टर को दी। कलेक्टर के निर्देश पर सिविल सर्जन और आरएमओ अस्पताल पहुंचे। इस दौरान जनरेटर चालू नहीं होने के कारणों की जानकारी ली गई। अधिकारियों ने कथित रूप से बताया कि डीजल आपूर्ति का करीब डेढ़ लाख रुपये का भुगतान बकाया होने के कारण पेट्रोल पंप संचालक ने डीजल देना बंद कर दिया था, जिससे जनरेटर नहीं चल पाया।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि बाद में आरएमओ एम्बुलेंस के माध्यम से डीजल की व्यवस्था करने गए और मरीजों के परिजनों के सहयोग से जनरेटर में डीजल डालकर बिजली व्यवस्था बहाल की गई। इसी दौरान अस्पताल की बिजली व्यवस्था संभाल रहे कर्मचारी महेश तिवारी ने कथित रूप से पत्रकार नितिन अग्रवाल को धमकी देते हुए कहा, *”कल तुझे देख लूंगा।”*
पत्रकार का आरोप है कि यह धमकी सार्वजनिक रूप से दी गई, जिससे वहां मौजूद मरीजों और उनके परिजनों में भी नाराजगी फैल गई। परिजनों के विरोध के बाद संबंधित कर्मचारी वहां से चला गया।
घटना के विरोध में पत्रकारों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर महेश तिवारी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने, पत्रकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा अस्पताल में उत्पन्न इस गंभीर स्थिति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन एवं आरएमओ के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की है।
पत्रकारों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन द्वारा शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम ने जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।