फतेहगंज पश्चिमी। नगर पंचायत में करीब 28.85 लाख रुपये की लागत से बनी सीसी सड़क एक माह के भीतर उखड़ने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दर्शन में शिकायत पहुंचने के बाद बुधवार को प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और सड़क की खुदाई कर उसकी गुणवत्ता की जांच की। जांच के दौरान सड़क की मोटाई को लेकर सवाल उठे तो मौके पर जमकर बहस और हंगामे की स्थिति बन गई।
मोहल्ला ठाकुरद्वारा निवासी अंशुल सक्सेना ने 8 जून को मुख्यमंत्री से शिकायत कर आरोप लगाया था कि मेन रोड से वार्ड 14-15 में अफजल के मकान की ओर बनाई गई सीसी सड़क और नाली निर्माण में बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई है। शिकायत में कहा गया कि लगभग 28.85 लाख रुपये की परियोजना में मानकों को दरकिनार कर घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग किया गया, जिसके चलते सड़क महज एक महीने में जगह-जगह से उखड़कर गड्ढों में तब्दील हो गई।
’10 इंच की जगह 2-3 इंच सड़क डालने’ का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि स्वीकृत स्टीमेट में पत्थर सहित करीब 10 इंच मोटी सड़क का प्रावधान था, लेकिन मौके पर केवल 2 से 3 इंच सीसी डालकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। घटिया सीमेंट और निर्माण सामग्री के कारण सड़क समय से पहले ही टूट गई।
मुख्यमंत्री स्तर से शिकायत का संज्ञान लेते हुए मामले की जांच के आदेश दिए गए थे। इसी क्रम में बुधवार को नायब तहसीलदार अरविंद कुमार, लेखपाल आदित्य गंगवार और नगर पंचायत के जेई मौके पर पहुंचे।
जेई को जांच में देखकर भड़का शिकायतकर्ता
जांच शुरू होते ही शिकायतकर्ता ने नगर पंचायत के जेई की मौजूदगी पर आपत्ति जताई और निष्पक्ष जांच की मांग की। विवाद बढ़ने पर पीडब्ल्यूडी के जेई संजय यादव को बुलाया गया, जिसके बाद दोबारा माप और परीक्षण कराया गया।
कहीं 4 इंच तो कहीं 7 इंच निकली सड़क
शाम तक चली जांच में सड़क की अलग-अलग स्थानों पर खुदाई कर मोटाई नापी गई। सूत्रों के अनुसार कहीं सड़क की मोटाई 4 इंच, तो कहीं 7 इंच पाई गई। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
पीडब्ल्यूडी जेई संजय यादव ने बताया कि सड़क के कुछ हिस्सों में मानक पूरे मिले हैं, जबकि कुछ जगह कमियां सामने आई हैं। जांच रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
जांच के दौरान दो पक्षों में तीखी नोकझोंक
मामला उस समय और गरमा गया जब सड़क पर खुदाई के दौरान मोहर्रम जुलूस के लिए गड्ढे खोदने को लेकर शिकायतकर्ता और दूसरे समुदाय के कुछ लोगों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। हालांकि मौके पर मौजूद अधिकारियों ने स्थिति संभाल ली।
“मैं जांच से संतुष्ट नहीं हूं”
शिकायतकर्ता अंशुल सक्सेना ने आरोप लगाया कि उनकी बात को पूरी तरह नहीं सुना गया और जांच केवल खानापूर्ति बनकर रह गई। उन्होंने निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग दोहराई है।
अब सबकी नजर जिलाधिकारी को भेजी जाने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी है। यदि आरोप सही पाए गए तो नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार पर कार्रवाई की तलवार लटक सकती है।
प्रवन पाण्डेय
इंडियन टीवी न्यूज़
जिला संवाददाता बरेली