इंडियन टीवी न्यूज़ सुशील चौहान
सिवनी ग्राम पंचायत अरी में इन दिनों विकास का एक नया ही मॉडल देखने को मिल रहा है।यह मॉडल है—”काम सिर्फ वही करो, जिसमें तगड़ी कमीशनखोरी हो।”पंचायत की निष्क्रियता और लापरवाही का आलम यह है कि गांव की मुख्य सड़कों और गलियों में लगी स्ट्रीट लाइटें महीनों से बंद पड़ी हैं।शाम ढलते ही पूरा गांव घने अंधेरे के आगोश में समा जाता है।स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को ठीक करवाने के लिए कई बार पंचायत प्रशासन से गुहार लगाई गई लेकिन सरपंच वंदना बोपचे सचिव महेश कुमार गौतम के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।
कमीशन वाले कामों में भारी दिलचस्पी!:
ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि पंचायत को उन कामों में रत्ती भर भी दिलचस्पी नहीं है जिससे जनता को सीधे राहत मिले।पंचायत का पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ उन निर्माण कार्यों और टेंडरों पर है जहाँ जमकर कमीशनखोरी (कटमनी) की जा सके।वहीं दूसरी ओर जहाँ बंदरबांट की गुंजाइश होती है,वहाँ रात-रात भर में फाइलें मंजूर हो जाती हैं।
एक आक्रोशित ग्रामीण जनता परेशान,हादसे का डर:
स्ट्रीट लाइट बंद होने के कारण गांव के बुजुर्गों महिलाओं और बच्चों का रात में घर से निकलना दूभर हो गया है। अंधेरे का फायदा उठाकर आए दिन चोरी-चपाटी की वारदातें और आवारा पशुओं के कारण दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है।लेकिन जनता की इस जायज परेशानी से ग्राम पंचायत अरी के नुमाइंदों को कोई सरोकार नहीं है।
मुख्य सवाल जो जनता पूछ रही है:
सरकारी फंड से लगी स्ट्रीट लाइटें अगर बंद हैं,तो उनके रख-रखाव का बजट कहाँ जा रहा है?
क्या ग्राम पंचायत अरी सिर्फ कमीशनखोरी का अड्डा बनकर रह गई है?उच्च अधिकारी इस खुली निष्क्रियता और भ्रष्टाचार पर मौन क्यों साधे हुए हैं?जनता के टैक्स के पैसे से चलने वाली पंचायतें अगर सिर्फ अपनी जेबें भरने में लग जाएं,तो लोकतंत्र और विकास दोनों का मज़ाक बन जाता है। ग्राम पंचायत अरी के जिम्मेदार लोग एसी कमरों से बाहर निकलें और जनता को इस अंधेरे और कमीशनखोरी के खेल से मुक्ति दिलाएं।इस मामले पर हमारी नज़र लगातार बनी रहेगी।