रिपोर्ट by अभिषेक कुमार पाण्डेय
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की कोचिंग कार्यशाला स्वदेशी तकनीकी नवाचारों एवं इन-हाउस इंजीनियरिंग समाधानों के माध्यम से कार्यकुशलता, संरक्षा तथा आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में निरंतर नए आयाम स्थापित कर रही है। “मोतीबाग वर्कशॉप” द्वारा विकसित विभिन्न तकनीकी नवाचारों ने अनुरक्षण कार्यों को अधिक सरल, संरक्षित एवं प्रभावी बनाया है। इन पहलों से कर्मचारियों की कार्यक्षमता में वृद्धि, श्रम एवं समय की बचत, संसाधनों का बेहतर उपयोग तथा संरक्षा संबंधी कार्यों के लिए मानव संसाधनों की अधिक उपलब्धता सुनिश्चित हुई है। ये प्रयास “मेक इन इंडिया” एवं “आत्मनिर्भर भारत” की भावना को सशक्त आधार प्रदान कर रहे हैं।
मोतीबाग वर्कशॉप द्वारा 4.5 किलोवाट एवं 25 किलोवाट ब्रशलेस अल्टरनेटर के परीक्षण हेतु एक मल्टीपर्पज़ टेस्ट बेंच का स्वदेशी रूप से विकास किया गया है। पूर्व में दोनों प्रकार के अल्टरनेटरों के लिए अलग-अलग परीक्षण व्यवस्था की आवश्यकता होती थी, जिससे पूंजीगत निवेश, स्थान एवं रखरखाव लागत अधिक थी। नई परीक्षण प्रणाली से एक ही प्लेटफॉर्म पर दोनों प्रकार के अल्टरनेटरों का परीक्षण संभव हो गया है, जिससे परीक्षण प्रक्रिया अधिक तेज, विश्वसनीय एवं किफायती बन गई है।
मोतीबाग वर्कशॉप ने आईसीएफ बोगी कंपोनेंट सेग्रिगेटर भी विकसित किया है, जिसके माध्यम से ब्रेक सिस्टम के विभिन्न अवयवों को व्यवस्थित रूप से अलग-अलग श्रेणियों में संरक्षित रखा जा सकता है। इससे पुर्जों के मिश्रित होने की संभावना समाप्त हुई है तथा पुनः संयोजन की प्रक्रिया अधिक सटीक एवं सुगम हो गई है। पहले इन भारी पुर्जों के संचालन के लिए क्रेन की आवश्यकता पड़ती थी, जिससे मरम्मत कार्य प्रभावित होता था। नई व्यवस्था से क्रेन पर निर्भरता समाप्त होने के साथ उत्पादन एवं अनुरक्षण कार्यों में तेजी आई है।
इसके अतिरिक्त, मोतीबाग वर्कशॉप ने एलएचबी बोगियों के संरक्षित उठान एवं परिवहन के लिए एक विशेष लिफ्टिंग फिक्स्चर विकसित किया है। पूर्व में सड़क क्रेन एवं कई कर्मचारियों की सहायता से यह कार्य किया जाता था, जिसमें फिसलने, झुकने तथा दुर्घटना की आशंका बनी रहती थी। नव विकसित लिफ्टिंग फिक्स्चर से बोगियों का संरक्षित एवं नियंत्रित उठान संभव हुआ है, जिससे कर्मचारियों की संरक्षा सुनिश्चित होने के साथ-साथ बोगी एवं उसके पुर्जों को क्षति की संभावना भी काफी कम हो गई है।
मोतीबाग कार्यशाला की ये अभिनव उपलब्धियाँ दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के यांत्रिक विभाग की तकनीकी दक्षता, नवाचार आधारित कार्य संस्कृति तथा लागत प्रभावी इंजीनियरिंग समाधानों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। ऐसे स्वदेशी नवाचार भारतीय रेलवे को अधिक संरक्षित, आधुनिक, दक्ष एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।