छत्तीसगढ़ स्टेट हेड रिपोर्टर किशोर कुमार
रायपुर। राजधानी रायपुर में रेलवे ट्रैक की संरक्षा और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गोंदवारा ओवरब्रिज और अंडरब्रिज के बीच संवेदनशील रेलवे ट्रैक पर भारी लोहे का पाइप रखकर मालगाड़ी को बेपटरी करने की कथित साजिश सामने आने के बाद ट्रैक पेट्रोलिंग व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के मुताबिक ट्रैक की नियमित निगरानी और पेट्रोलिंग का जिम्मा संभालने वाले 11 ग्रुप-डी ट्रैकमैन फील्ड में ड्यूटी करने के बजाय कार्यालयों में तैनात बताए जा रहे हैं। आरोप है कि वरिष्ठ खंड अभियंता (PWI) कार्यालय रायपुर में पदस्थ इन कर्मचारियों को अधिकारियों की कथित मिलीभगत से फील्ड ड्यूटी से हटाकर कार्यालयीन कार्य में लगाया गया है।
रेलवे ट्रैक की सुरक्षा व्यवस्था में ट्रैकमैन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इन कर्मचारियों का काम ट्रैक की नियमित जांच, पेट्रोलिंग और किसी भी तरह की गड़बड़ी या खतरे की तत्काल पहचान करना होता है। ऐसे में यदि बड़ी संख्या में ट्रैकमैन फील्ड से हटकर कार्यालयों में ड्यूटी कर रहे हैं, तो यह रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय माना जा सकता है।
मामले में PWI (सीनियर सेक्शन इंजीनियर) के वाट्सएप नंबर पर कार्यालय में ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों के पद और उनकी तैनाती से संबंधित जानकारी के लिए फोटो भेजकर सवाल किया गया। हालांकि, संबंधित अधिकारी ने इस संबंध में स्पष्ट जवाब देने से बचने की कोशिश की।
गोंदवारा में रेलवे ट्रैक पर लोहे का पाइप रखे जाने की घटना के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब ट्रैक की सुरक्षा के लिए तैनात कर्मचारी फील्ड में मौजूद नहीं होंगे, तो संवेदनशील रेलवे लाइन की निगरानी आखिर कैसे होगी?
रेलवे प्रशासन को इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि 11 ट्रैकमैन को फील्ड ड्यूटी से हटाकर कार्यालय में किस आदेश के तहत तैनात किया गया और इस व्यवस्था के लिए जिम्मेदार कौन है। साथ ही रेलवे ट्रैक की पेट्रोलिंग व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।