बारीपदा :सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता सामने आई है। लंबे समय से लगातार निगरानी और संरक्षण व्यवस्था के बीच अब बाघिन जिन्नत को पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से जंगल में विचरण करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। जल्द ही उसकी गर्दन में निगरानी के लिए लगाया गया रेडियो कॉलर हटाया जा सकता है।इसके बाद जिन्नत अपने शावकों के साथ सिमिलिपाल के घने जंगलों में पूरी तरह स्वच्छंद होकर विचरण कर सकेगी। सिमिलिपाल में बाघों की आनुवंशिक विविधता बढ़ाने और वंशवृद्धि के उद्देश्य से जिन्नत को महाराष्ट्र के प्रसिद्ध ताडोबा- अंधारी टाइगर रिजर्व से सिमिलिपाल लाया गया था।
नए वातावरण में सफलतापूर्वक ढलने के बाद जिन्नत ने चार स्वस्थ शावकों को जन्म देकर सिमिलिपाल में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। वन विभाग की ओर से लगातार उसकी गतिविधियों, स्वास्थ्य और शावकों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।वन विभाग के अनुसार, जब बाघिन की स्वास्थ्य स्थिति पूरी तरह सामान्य रहने और जंगल के प्राकृतिक वातावरण में उसके पूरी तरह अनुकूल हो जाने की पुष्टि हो गई, तब उसके रेडियो कॉलर को हटाने का निर्णय लिया गया है। इससे जिन्नत और उसके शावकों को बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के प्राकृतिक वातावरण में स्वतंत्र रूप से विचरण करने का अवसर मिलेगा।सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व के इतिहास में जिन्नत का सफलतापूर्वक बसना और चार शावकों को जन्म देना वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह सफलता ओडिशा में बाघ संरक्षण और आनुवंशिक विविधता बढ़ाने के प्रयासों को नई दिशा और उत्साह प्रदान करने वाली है।
मयूरभंज से हिमांशु शेखर प्रहराज।