रायरंगपुर, 1/9: हो भाषा को संवैधानिक मान्यता देने तथा ओडिशा में इसे दूसरी राजभाषा का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन चल रहा है। इसी क्रम में जमदा क्षेत्र की बिरसा मुंडा समिति के पदाधिकारी इन मांगों को लेकर भुवनेश्वर के पीएमजी चौक पर धरने पर बैठे हैं।बताया गया है कि आंदोलन के दौरान हो समाज से जुड़े मंत्री और विधायकों के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है। मंत्री गणेशराम सिंहखुंटिया तथा विधायक पद्मचरण हाईबुरु, जलेन नायक और लक्ष्मण मुंडा के खिलाफ गाली-गलौज किए जाने की रायरंगपुर में आयोजित बैठक में कड़ी निंदा की गई।आदिवासी हो समाज महासभा की ओर से कहा गया कि हो भाषा और हो समाज के विकास में मंत्री एवं विधायकों का भी योगदान रहा है। भाषा की मान्यता की मांग को लेकर आंदोलन करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन राजनीतिक उद्देश्य से किसी मंत्री या विधायक को अपमानित करना उचित नहीं है।रायरंगपुर यात्री निवास में आदिवासी हो समाज महासभा की बैठक अध्यक्ष मनोरंजन तिरिया के आह्वान पर आयोजित हुई। बैठक में सर्वसम्मति से आगामी 11 सितंबर को ‘हो समाज अधिकार समावेश एवं शोभायात्रा’ आयोजित करने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।बैठक में केंद्र सरकार से हो भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कर संवैधानिक मान्यता देने तथा ओडिशा में दूसरी राजभाषा का दर्जा देने की मांग की गई। इसके अलावा हो और कोल्ह जाति को एक ही हो जाति के रूप में मान्यता देने, हो समाज को अवैध धर्मांतरण और धार्मिक आक्रमण से सुरक्षा प्रदान करने तथा आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं की रक्षा करने की मांग उठाई गई।बैठक में यह भी मांग की गई कि आदिवासी संस्कृति और परंपराओं से दूर जाकर विदेशी धर्म अपनाने वाले आदिवासियों को आदिवासी आरक्षण एवं अन्य सरकारी सुविधाओं से वंचित किया जाए।वामनघाटी क्षेत्र में लगभग 200 वर्ष पहले आदिवासी विद्रोह का नेतृत्व करने वाले वीर मान्डो बागे (मानवीर), हिताई पिंगुआ (हरिड़ाबेड़ा) और रघुवीर कंडांकेल (बसंतपुर) से जुड़े गांवों को ऐतिहासिक एवं विरासत ग्राम घोषित करने की मांग भी उठाई गई।इसके साथ ही आदिवासियों के पूजा स्थल जाहिरा (देसाउली) की सुरक्षा एवं विकास, हो समाज के देहुरी/दिउरी और डाकुआ समुदाय को सरकारी मान्यता एवं सहायता, प्राथमिक शिक्षा से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक वारांग क्षिति लिपि में हो भाषा की पढ़ाई की व्यवस्था करने की मांग की गई।बैठक में हो भाषा की लिपि के प्रणेता गुरु लाको बदरा की जयंती, 19 सितंबर, को सरकारी स्तर पर मनाने की मांग पर भी चर्चा हुई।इस बैठक में कुसुमी, रायरंगपुर, बिजातला, बहलदा, तिरिंग और यशिपुर सहित विभिन्न प्रखंडों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। पूर्व कामदा ब्लॉक चेयरमैन एवं पासना सरपंच मालती आलड़ा, तिरिंग ब्लॉक के बड़डालिमा सरपंच रामेश्वर पूर्ति, जयविकाश पिंगुआ, मोनिका कंडाकेले, दशमा पूर्ति, सांगि जंक, माधवचंद्र देवगाम, राजेश कुमार बदरा, सिंह राय देवगाम, धनी बैपाई, सागर सिंकु, टूरा हेम्ब्रम, हिंदू हेम्ब्रम, सेलाय पूर्ति, संजय तिरिया, आजाद चातार और बिरसा पूर्ति सहित कई लोग मौजूद रहे और चर्चा में सक्रिय रूप से भाग लिया।