पूर्वी सिंहभूम, 13/09/2026: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बिछीनांचल क्षेत्र अंतर्गत शासन गम्भारिया गांव में स्वर्गीय विष्णुपद प्रहराज की पत्नी स्वर्गीय सरस्वती प्रहराज की प्रथम पुण्यतिथि श्रद्धा एवं भावुक वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों एवं ग्रामीणों ने उन्हें श्रद्धापूर्वक याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
सरस्वती प्रहराज एक उदार, दयालु, स्नेही एवं परोपकारी महिला थीं। गरीब और जरूरतमंद लोगों का दुख देखकर वह भावुक हो जाती थीं और अपनी क्षमता के अनुसार उनकी सहायता करती थीं। जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र सहित विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान करने के अनेक उदाहरण आज भी गांव में देखने और सुनने को मिलते हैं। उनके मानवीय व्यवहार और परोपकारी स्वभाव के कारण ग्रामीणों के बीच उनकी विशेष पहचान थी।ग्रामीण परिवेश में रहते हुए उन्होंने अपने पांच पुत्रों और एक पुत्री का पालन-पोषण बड़े स्नेह एवं समर्पण के साथ किया तथा सभी को उच्च शिक्षा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपने बच्चों के भविष्य को संवारने के साथ-साथ उन्होंने परिवार और समाज के प्रति भी अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया। उनके निधन के बाद भी ग्रामीण उन्हें उनके सरल स्वभाव, स्नेह और सेवा भावना के लिए याद करते हैं।पुण्यतिथि के अवसर पर उनके पांचों पुत्र, पांच बहुएं, एक पुत्री, एक दामाद तथा 12 नाती-नातिन सहित परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। ज्येष्ठ पुत्र कमलाकांत प्रहराज ने कर्ता के रूप में अपनी माता के श्राद्ध एवं धार्मिक कर्मकांड को वैदिक रीति-रिवाज के अनुसार संपन्न किया।इस अवसर पर रंजीता प्रहराज, रतिकांत प्रहराज, पुष्पलता प्रहराज, श्रीकांत प्रहराज, भारती प्रहराज, सुशांत प्रहराज, कल्पिता प्रहराज, मनोज प्रहराज, मानसी प्रहराज तथा सुप्रभा एवं उनके पति ईशान कर सहित परिवार के अन्य सदस्य मौजूद रहे।कार्यक्रम के दौरान स्वर्गीय विष्णुपद प्रहराज एवं स्वर्गीय सरस्वती प्रहराज की प्रतिमाओं की स्थापना भी की गई। प्रतिमा स्थापना के बाद परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने दोनों दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान माहौल काफी भावुक हो गया और लोगों ने सरस्वती प्रहराज के साथ बिताए समय एवं उनके सेवा भाव को याद किया।सरस्वती प्रहराज की इच्छा के अनुरूप उनके परिवार की ओर से स्थानीय ओड़िया उच्च विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण भी किया गया। परिवार ने इस पहल के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ उनकी स्मृति को सदैव जीवित रखने का संदेश दिया।कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि सरस्वती प्रहराज भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके संस्कार, सेवा भावना और परोपकार की भावना हमेशा लोगों को प्रेरणा देती रहेगी।
मयूरभंज से हिमांशु प्रहराज।