कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर: पीएफ कटौती की अधिकतम वेतन सीमा बढ़कर ₹25,000 हुई; 51 लाख से अधिक को मिलेगा लाभ ।
नई दिल्ली, 16 सितंबर: देश के करोड़ों वेतनभोगियों और श्रमिकों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। प्रोविडेंट फंड (PF) कटौती के लिए लागू अधिकतम मासिक वेतन सीमा (Salary Ceiling) को बढ़ा दिया गया है। पूर्व में यह सीमा 15,000 रुपये थी, जिसे अब बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है, जिसकी जानकारी केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी है।
सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले से देश के लगभग 51 लाख से अधिक कर्मचारी सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। विशेष रूप से जिन कर्मचारियों का मासिक वेतन 15,000 रुपये से 25,000 रुपये के बीच है, वे अब संशोधित पीएफ नियमों के दायरे में आ जाएंगे। इस नई व्यवस्था को इस वर्ष विश्वकर्मा जयंती यानी 17 सितंबर से लागू किया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि श्रमिकों और कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को अधिक व्यापक और सुदृढ़ बनाना इस कदम का मुख्य उद्देश्य है। इससे अधिक से अधिक श्रमिक कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के दायरे में आ सकेंगे। कर्मचारी संगठनों की ओर से यह लंबे समय से की जा रही मांग थी, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में मंजूरी दी गई है।
इस नए नियम के लागू होने से केंद्र सरकार के खजाने पर सालाना लगभग 11,339 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ पड़ेगा। इससे पहले सरकार सालाना करीब 10,250 करोड़ रुपये की बजटीय सहायता प्रदान कर रही थी। इसके साथ ही, नए नियमों के अनुसार नियोक्ताओं (कंपनियों) का पीएफ योगदान भी प्रति कर्मचारी लगभग 600 रुपये बढ़ जाएगा।
इस निर्णय से कर्मचारियों की न केवल पीएफ बचत बढ़ेगी, बल्कि सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) के बाद मिलने वाली मासिक पेंशन और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा (EDLI) राशि में भी बड़ी बढ़ोतरी होगी। हालांकि, पीएफ मद में अधिक राशि कटने के कारण कर्मचारियों का इन-हैंड वेतन (Take-home salary) थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन भविष्य के लिए उनका संचय कोष काफी मजबूत हो जाएगा। वर्ष 2014 के बाद यानी करीब 12 वर्षों के बाद सरकार ने पीएफ सीमा में इस तरह का बदलाव किया है, जिससे श्रमिक वर्ग में खुशी की लहर है।