मंदसौर/गरोठ।
गांधीसागर बांध की देखरेख, लाइट व्यवस्था और विभागीय वाहनों के डीजल के नाम पर सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। उपलब्ध दस्तावेजों और प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, बांध क्षेत्र में नई लाइट लगाने, वाहनों में डीजल भरवाने तथा अन्य सामग्री के नाम पर लाखों रुपये के बिल तैयार कर भुगतान किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।रिपोर्ट के मुताबिक, मामले में उपयंत्री की अनुमति/हस्ताक्षर से जुड़े दस्तावेजों पर भी सवाल खड़े हुए हैं। आरोप है कि कुछ बिलों का भुगतान महज 72 घंटे के भीतर कर दिया गया। वहीं संबंधित अधिकारियों के बयानों में भी इस पूरे मामले को लेकर अलग-अलग बातें सामने आने की बात कही गई है।
कागजों में लाइटें, मौके पर व्यवस्था पर सवाल
मामले में गांधीसागर बांध, डैम हेडवर्क्स, पावर हाउस सहित अलग-अलग स्थानों पर लाइट व्यवस्था के लिए राशि खर्च किए जाने का उल्लेख है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि जिन स्थानों पर लाइट लगाने के नाम पर भुगतान हुआ, वहां वास्तविक व्यवस्था और दस्तावेजों में दर्शाई गई व्यवस्था में अंतर की जांच की जरूरत है।
डीजल की खपत पर भी उठे सवाल
विभागीय वाहनों के लिए डीजल के नाम पर भी बड़ी राशि खर्च होने का मामला सामने आया है। रिपोर्ट में वाहन नंबर, डीजल की मात्रा और भुगतान से संबंधित प्रविष्टियों पर सवाल उठाए गए हैं। ऐसे में लॉगबुक, डीजल पर्चियों, वाहन की वास्तविक आवाजाही और भुगतान अभिलेखों का मिलान किए जाने पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
फर्जी हस्ताक्षर का आरोप, जांच से खुलेगा सच
सबसे गंभीर सवाल कथित तौर पर उपयंत्री के हस्ताक्षर से जुड़े दस्तावेजों को लेकर उठ रहा है। यदि हस्ताक्षर वास्तव में अधिकृत अधिकारी के नहीं हैं तो यह गंभीर प्रशासनिक एवं वित्तीय मामला बन सकता है। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि विभागीय जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही हो सकेगी।
अब बड़ा सवाल यह है कि सरकारी राशि से किए गए इन भुगतानों में नियमों का कितना पालन हुआ और जिन कार्यों के नाम पर राशि निकाली गई, वे वास्तव में मौके पर हुए भी या नहीं? मामले की निष्पक्ष जांच होने पर ही पूरे प्रकरण की वास्तविक तस्वीर सामने आएगीजिला ब्यूरो चीफ मंदसौर
रामप्रसाद धनगर गुर्जर पत्रकार कि ख़ास रिपोर्ट