मयूरभंज: जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे का विस्तार होने के बावजूद आवश्यक डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट, तकनीशियन एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की कमी के कारण मरीजों को अपेक्षित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। विशेष रूप से बारीपदा स्थित पंडित रघुनाथ मुर्मू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के चलते बड़ी संख्या में मरीजों को अन्यत्र रेफर किए जाने का आरोप सामने आया है।लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद वर्ष 2017 में बारीपदा में पीआरएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की स्थापना की गई थी। मेडिकल कॉलेज की स्थापना के बाद जिले के लोगों को अपने क्षेत्र में बेहतर एवं उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा मिलने की उम्मीद जगी थी। वहीं गत 8 जून को रंगामाटिया स्थित मेडिकल कॉलेज परिसर में 650 बेड वाले नए टीचिंग अस्पताल का मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने लोकार्पण किया था। हालांकि नए अस्पताल के लोकार्पण के बाद भी मरीजों को सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने की शिकायत सामने आ रही है।बताया जा रहा है कि अस्पताल में सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी महत्वपूर्ण जांच सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को इसके लिए जिला मुख्य चिकित्सालय तक करीब 7 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। गंभीर मरीजों के लिए इस तरह की आवाजाही परेशानी का कारण बन रही है।इतना ही नहीं, सामान्य उपचार के बाद भी कई मरीजों को कटक जैसे बड़े शहरों के अस्पतालों में रेफर किए जाने की शिकायत है। लैप्रोस्कोपिक सर्जरी जैसी आधुनिक चिकित्सा पद्धतियां तो दूर, कुछ सामान्य ऑपरेशन भी नियमित रूप से नहीं हो पाने का आरोप लगाया जा रहा है। इसका सीधा असर गरीब एवं मध्यमवर्गीय मरीजों पर पड़ रहा है। मजबूरी में कई मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।हृदय रोग जैसी महत्वपूर्ण चिकित्सा सेवा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण गंभीर हृदय रोगियों को कटक और भुवनेश्वर जाना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज में उन्नत चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञ विभागों का विकास नहीं होने पर मेडिकल कॉलेज की स्थापना के मूल उद्देश्य को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।पीआरएम मेडिकल कॉलेज में 125 एमबीबीएस सीटें हैं। इतनी संख्या में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए प्रत्येक विभाग में पर्याप्त संख्या में शिक्षक एवं अध्यापक होना आवश्यक है। लेकिन आरोप है कि एनाटॉमी विभाग में आवश्यक संख्या में अध्यापक उपलब्ध नहीं हैं।शिकायत के अनुसार, एनाटॉमी विभाग में फिलहाल एक प्रोफेसर और एक अध्यापक के भरोसे काम चल रहा है। वहीं राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के मानदंडों के अनुसार विभाग में इससे अधिक संख्या में शिक्षक एवं अध्यापकों की आवश्यकता बताई जा रही है। अध्यापकों की कमी का असर विद्यार्थियों की प्रैक्टिकल शिक्षा पर पड़ने का भी आरोप है। डिसेक्शन हॉल, म्यूजियम और अन्य आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद पर्याप्त अध्यापक नहीं होने के कारण इनका पूर्ण उपयोग नहीं हो पा रहा है। प्रति बैच 125 विद्यार्थियों की शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर इसे चिंता का विषय बताया जा रहा है।मेडिकल कॉलेज एवं जिला मुख्य चिकित्सालय को छोड़कर मयूरभंज जिले में 28 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और 87 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) हैं। इसके अलावा बारीपदा में चार शहरी स्वास्थ्य केंद्र सहित जिले के अन्य शहरों में भी शहरी स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं।हालांकि इन स्वास्थ्य केंद्रों में भी डॉक्टरों के साथ-साथ नर्स, फार्मासिस्ट, तकनीशियन एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के कई पद खाली पड़े होने की शिकायत है। पीआरएम अस्पताल के रंगामाटिया स्थानांतरित होने के बाद जिला मुख्य चिकित्सालय में भी डॉक्टरों की कमी होने की बात कही जा रही है। परिणामस्वरूप विभिन्न पीएचसी और सीएचसी से डॉक्टरों को प्रतिनियुक्ति पर जिला मुख्य चिकित्सालय लाकर स्वास्थ्य सेवाएं संचालित करने की शिकायत सामने आ रही है।मयूरभंज एक विस्तृत एवं अनेक दुर्गम क्षेत्रों वाला जिला है। जिले के दूरदराज इलाकों में आज भी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। कई स्थानों पर सड़क एवं पुल जैसी संपर्क सुविधाओं की कमी के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।ऐसी स्थिति में गंभीर मरीजों को खाट या अन्य साधनों के माध्यम से मुख्य सड़क तक ले जाने की घटनाएं भी सामने आती हैं। स्वास्थ्य केंद्रों की दूरी, डॉक्टरों की कमी और संपर्क व्यवस्था की समस्या के कारण कुछ दुर्गम इलाकों में लोग आज भी पारंपरिक उपचार तथा स्थानीय स्तर पर प्रचलित झाड़-फूंक जैसी पद्धतियों पर निर्भर होने को मजबूर होने का आरोप है।जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के लिए रिक्त डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट, तकनीशियन एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के पदों को जल्द भरने की मांग उठ रही है। साथ ही पीआरएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में आवश्यक विशेषज्ञ विभाग शुरू करने, सीटी स्कैन एवं एमआरआई जैसी महत्वपूर्ण जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा आवश्यक ऑपरेशन एवं चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने की मांग बुद्धिजीवी वर्ग की ओर से की जा रही है।मेडिकल कॉलेज केवल एक शिक्षण संस्थान तक सीमित न रहकर जिले की बड़ी आबादी के लिए उन्नत चिकित्सा केंद्र के रूप में भी प्रभावी ढंग से कार्य करे, ऐसी अपेक्षा है। इसलिए आधारभूत ढांचे के साथ-साथ मानव संसाधन की कमी दूर कर मयूरभंज के लोगों को अपने ही जिले में गुणवत्तापूर्ण और सुलभ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।
मयूरभंज से हिमांशु शेखर प्रहराज, ओडिशा राज्य प्रमुख।