सोनभद्र ।इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुद्धी तहसील के बघाड़ू गांव में जनजातीय भूमि से जुड़े विवादित बैनामों को शून्य घोषित कर 40 गाटों की करीब 5.7142 हेक्टेयर जमीन ग्राम सभा में निहित करने के जिला प्रशासन के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद प्रशासन अब इस भूमि को सार्वजनिक उपयोग की योजनाओं से जोड़ने की तैयारी में जुट गया है।
हाईकोर्ट का फैसला और प्रशासन की कार्रवाई
प्रशासन के मुताबिक, धर्मांतरण के बाद रजिया (उर्फ नन्हकी/दुलरिया) के नाम से जनजातीय भूमि के कई बैनामे कराए गए थे, जिनकी जांच में अनियमितता पाई गई। राजस्व प्रशासन ने इन बैनामों को कानूनन शून्य मानते हुए 40 गाटों की कुल 5.7142 हेक्टेयर जमीन ग्राम सभा में निहित करने का आदेश जनवरी 2026 में पारित किया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए रजिया ने अप्रैल में इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन अदालत ने प्रशासनिक आदेश को बरकरार रखते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि केवल धर्म परिवर्तन या अंतर-धार्मिक विवाह से स्वतः अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा समाप्त नहीं होता, लेकिन यह साबित करना आवश्यक है कि व्यक्ति जनजातीय रीति-रिवाजों, परंपराओं और अपने मूल समुदाय से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता अपने मूल भुइयां जनजाति से निरंतर जुड़ाव के पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सकी, इसलिए भूमि हस्तांतरण को यूपी जमींदारी विनाश एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1950 की धारा 157-बी के तहत अवैध और शून्य माना गया।
अब भूमि का सार्वजनिक उपयोग, खेल मैदान, बरात घर और बिरसा मुंडा की प्रतिमा
हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन ने ग्राम सभा में निहित भूमि के सार्वजनिक उपयोग की योजना पर काम शुरू कर दिया है। प्रशासन के अनुसार, भूमि के एक हिस्से में बच्चों के लिए खेल मैदान, स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए बारात घर और आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्थापित करने की योजना है। शेष भूमि पर आवश्यकता के अनुसार शासकीय भवनों के निर्माण की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।
एसडीएम और बीजेपी नेता के बयान
एसडीएम दुद्धी अशोक गुप्ता के अनुसार, दो महिलाओं के नाम से जनजातीय भूमि का हस्तांतरण कराया गया था, जिसकी जांच में दस्तावेजों के दुरुपयोग और अनियमितता पाए जाने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की। वहीं, बीजेपी जिलाध्यक्ष नंदलाल गुप्ता ने इस मामले को उठाते हुए इसे ‘लैंड जिहाद’ बताया है और बघाड़ू व पनौरा क्षेत्र में जमीन के स्वामित्व और मतदाता सूचियों में बदलाव की भी जांच की मांग की है।
नंदलाल गुप्ता ने बघाड़ू और पनौरा में मुस्लिम एवं हिंदू मतदाताओं की संख्या में बदलाव के आंकड़े भी सामने रखे हैं। उनके दावों के मुताबिक, बघाड़ू में मुस्लिम मतदाता 2003 में 430 से बढ़कर 2026 में 902 हो गए, जबकि पनौरा में 359 से 496 पहुंच गए। हालांकि, ये आंकड़े उनके द्वारा किए गए दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
आगे की कार्रवाई
प्रशासन का कहना है कि भूमि से जुड़े मामलों में अभिलेखों और कानून के आधार पर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। बघाड़ू गांव झारखंड सीमा से सटा हुआ है और यहां आदिवासियों की जमीनों की खरीद-फरोख्त में दस्तावेजों के कथित दुरुपयोग का मामला लंबे समय से चर्चा में रहा है। हाईकोर्ट के इस फैसले को प्रशासन की कार्रवाई को कानूनी मुहर माना जा रहा है।