तोप कुमार पटेल की रिपोर्ट
बैतूल।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वावधान में आत्मबोध से विश्वबोध विषय पर व्याख्यान, सम्मान समारोह एवं रचना पाठ का आयोजन विश्वकर्मा मंदिर में संपन्न हुआ। कार्यक्रम केन्द्रीय मंत्री डीडी उइके के आतिथ्य में, मुख्य वक्ता पद्मश्री मोहन नागर एवं राष्ट्रीय प्रचार-प्रसार प्रमुख प्रवीण गुगनानी, प्रांत अध्यक्ष सुनील पांसे, जिला अध्यक्ष पुष्पक देशमुख, प्रांतीय मीडिया प्रभारी नवल महामंत्री, महामंत्री धर्मेन्द्र खौसे और जिले के साहित्यकारों की उपस्थिति में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में लेखक व पत्रकार अरविंद मालवीय को उनके साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यो के लिए स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस मौके पर डीडी उइके ने कहा कि आत्मबोध से विश्वबोध का अर्थ है अपनी आंतरिक चेतना या स्व को जानने से लेकर संपूर्ण ब्रह्मांड व समाज के साथ एकात्म होने की यात्रा। आत्मबोध का अर्थ स्वयं की पहचान, अपने विचारों, भावनाओं, शक्तियों और कमियों को गहराई से समझना। प्रवीण गुगनानी ने कहा कि आंतरिक चेतना अहंकार की सीमाओं से ऊपर उठकर अपने वास्तविक अस्तित्व को जानना। मानसिक स्पष्टता मन की उलझनों को शांत कर सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना। विश्वबोध का अर्थ मैं से हम की यात्रा व्यक्तिगत स्वार्थ से निकलकर संपूर्ण मानवता और प्रकृति के प्रति करुणा का भाव रखना है। मोहन नागर और नवल वर्मा ने कहा कि समग्र दृष्टि यत्र पिंडे, तत्र ब्रह्माण्डे यानी जो इस पिंड या शरीर में है, वही ब्रह्मांड में है के सिद्धांत को अनुभव करना। वैश्विक कल्याण में इसका उद्देश्य है कि समाज, संस्कृति और पूरे विश्व को अपना परिवार मानकर उसके कल्याण में योगदान देना। श्री मालवीय को सम्मानित किए जाने पर इष्ट मित्रों, परिजनों और बैतूल के साहित्यकारों ने बधाई दी है।