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सीहोर के कोसमी गांव में आदिवासियों के मकान तोड़े जाने का आरोप, न्याय की मांग को लेकर भोपाल कूच
7 पीढ़ियों से निवास का दावा करने वाले आदिवासी परिवारों के सामने आवास का संकट, वन विभाग की कार्रवाई पर उठे सवाल
सीहोर/भोपाल, मध्य प्रदेश | रिपोर्टर राहुल अहिरवार | INDIAN TV NEWS
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले की इछावर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम कोसमी से आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, वन विभाग की कार्रवाई के चलते कई आदिवासी परिवारों को अपने घरों से बेदखल होना पड़ा है। प्रभावित परिवारों का दावा है कि वे सात पीढ़ियों से भी अधिक समय से उक्त स्थान पर निवास करते आ रहे हैं।
🏠 पीढ़ियों से निवास, फिर भी आवास का संकट?
स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके परिवार लंबे समय से इस क्षेत्र में रहते आए हैं। मकान तोड़े जाने की घटना के बाद प्रभावित परिवारों के सामने रहने और परिवारों को सुरक्षित रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।
इस मामले में प्रमुख सवाल यह है कि मकानों को तोड़ने से पहले संबंधित परिवारों के निवास, भूमि पर उनके अधिकारों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच किस प्रकार की गई। साथ ही, वन विभाग की कार्रवाई किस कानूनी आधार पर की गई और प्रभावित परिवारों को नियमानुसार नोटिस तथा सुनवाई का अवसर दिया गया या नहीं, इसकी भी जांच आवश्यक है।
📢 आदिवासी परिवारों ने न्याय के लिए किया भोपाल कूच
मिली जानकारी के अनुसार, प्रभावित आदिवासी समुदाय के लोग अपनी समस्याओं और मांगों को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने के लिए भोपाल की ओर रवाना हो चुके हैं। उनका उद्देश्य कथित बेदखली के मामले में न्याय प्राप्त करना और अपने आवास एवं भूमि से जुड़े अधिकारों की रक्षा की मांग उठाना है।
⚖️ आदिवासी अधिकारों और कानूनी प्रक्रिया का सवाल
वन भूमि पर लंबे समय से निवास करने वाले पात्र अनुसूचित जनजाति परिवारों के अधिकारों के संबंध में वन अधिकार अधिनियम, 2006 महत्वपूर्ण है। हालांकि, केवल लंबे समय से निवास करने के आधार पर भूमि का स्वामित्व स्वतः निर्धारित नहीं हो जाता। प्रत्येक मामले में भूमि की स्थिति, पात्रता, उपलब्ध साक्ष्य और लागू कानूनी प्रक्रिया की जांच आवश्यक है।
प्रशासन को मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि कार्रवाई किन नियमों के तहत की गई, प्रभावित परिवारों के दावों पर विचार हुआ या नहीं और उनके पुनर्वास अथवा अन्य वैधानिक राहत की क्या संभावनाएं हैं।
🔴 प्रशासन के आधिकारिक पक्ष का इंतजार
फिलहाल, मकान तोड़े जाने की कार्रवाई से संबंधित वन विभाग का आधिकारिक पक्ष, प्रभावित परिवारों की संख्या, कार्रवाई की तारीख और भूमि के कानूनी दर्जे की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। इन तथ्यों के सामने आने के बाद ही मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सवाल यही है: ग्राम कोसमी के प्रभावित आदिवासी परिवारों की समस्याओं का समाधान कब होगा और उन्हें न्याय दिलाने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाएगा?
रिपोर्टर: राहुल अहिरवार
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