कटरा श्रावस्ती,
अवध क्षेत्र का सामूहिक क्षमावाणी पर्व*आजादी का अमृत महोत्सव एवं मिशन शक्ति के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश जैन विद्या शोध संस्थान , लखनऊ संस्कृति विभाग उ.प्र. के तत्वावधान में तृतीय तीर्थंकर भगवान संभवनाथ की जन्मभूमि श्री दिगम्बर जैन मन्दिर, श्रावस्ती के परिसर में श्री १०८ आचार्य सुबल सागर के ससंघ सानिध्य में*अनेकान्त सिद्धान्त का वैशिष्ट्य एवं उपयोगिता* विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ l

कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान संभव नाथकाजलाभिषेक करके किया गयाlआयोजनमेंंलखनऊ,बाराबंकी, बहराइच, बलरामपुर,गोंडा के श्रद्धालु सम्मलित हुएlआचार्य सुबल सागर आशीष वचन देते हुए कहा कि क्षमावाणी का पर्व सौहार्द, सौजन्यता और सद्भावना का पर्व है। आज के दिन एक दूसरे से क्षमा मांगकर मन की कलुषता को दूर किया जाता है। मानवता जिन गुणों से समृद्ध होती है उनमें क्षमा प्रमुख और महत्वपूर्ण है। कषाय के आवेग में व्यक्ति विचार शून्य हो जाता है। और हिताहित का विवेक खोकर कुछ भी करने को तैयार हो जाता है। लकड़ी में लगने वाली आग जैसे दूसरों को जलाती ही है, पर स्वयं लकड़ी को भी जलाती है। इसी तरह क्रोध कषाय को समझ पर विजय पा लेना ही क्षमा धर्म है। जैन विद्या शोध संस्थान उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग के उपाध्यक्ष प्रोफेसर अभय कुमार जैन ने कहा कि कवि रामधारी सिंह दिनकर ने कहा है कि क्षमा वीरों को ही सुहाती है। उन्होंने लिखा है कि- क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो, उसका क्या जो दंतहीन, विषहीन, विनीत सरल हो।।क्षमा को सभी धर्मों और संप्रदायों में श्रेष्ठ गुण करार दिया गया है। जैन संप्रदाय में इसके लिए एक विशेष दिन का आयोजन क्षमावाणी के रूप में किया जाता है।
मनोविज्ञानी भी क्षमा या माफी को मानव व्यवहार का एक अहम हिस्सा मानते हैं। उनका कहना है कि यह इंसान की जिन्दगी का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू है।बौद्ध एवं जैन शोध संस्थान लखनऊ के डारेक्टर राकेशसिंह ने कहा कि क्षमावणी पर्व हमारी वैमनस्यता, कलुषता बैर—दुश्मनी एवं आपस की तमाम प्रकार की टकराहटों को समाप्त कर जीवन में प्रेम, स्नेह, वात्सल्य, प्यार, आत्मीयता की धारा को बहाने का नाम है, हम अपनी कषायों को छोड़ें, अपने बैरों की गांठों को खोलें, बुराइयों को समाप्त करें, बदले, प्रतिशोध की भावना को नष्ट करें, नफरत—घृणा, द्वेष बंद करें, आपसी झगड़ों, कलह को छोड़ें।अनुसंधानकर्ताओं ने यह निष्कर्ष निकाला है कि लम्बे समय तक मन में बदले की भावना, ईर्ष्या—जलन और दूसरों के अहित का चिन्तन और प्रयास करने पर मनुष्य भावनात्मक रूप से बीमार रहने लगता है।जीवन में जब भी कोई छोटी-बड़ी परेशानी आती है तब व्यक्ति अपने मूल स्वभाव को छोड़कर पतन के रास्ते पर चल पड़ता है। जो कि सही नहीं है, हर व्यक्ति को अपने सही मार्ग पर चलना चाहिए। इस दौरान कमेटी के द्वारा कई मात्र शक्तियों तथा समाजसेवियों को सम्मानित किया गया उक्त अवसर पर कमेटी के अध्यक्ष संजीव कुमार जैन, महेंद्र कुमार जैन, सुरेंद्र कुमार जैन ,प्रकाश चंद्र जैन स्वरूप चन्द जैन, डिम्पल जैन, पीयूष जैन, पवन जैन आदि जैन समाज के भक्तगण मौजूद रहे।
शिवा जायसवाल
जिला संवाददाता श्रावस्ती।