दुद्धी सोनभद्र। कौमी एकता समिति दुद्धी के तत्वावधान में तहसील प्रांगण में मंगलवार को भव्य अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शामिल कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक सौहार्द, महिला सशक्तिकरण, राष्ट्रीय एकता और समसामयिक सरोकारों पर प्रभावी संदेश दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि उ प्र सरकार के समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव सिंह गोंड, अध्यक्षता कर रहे पूर्व सांसद रामशकल एवं विशिष्ट अतिथि अनुसूचित जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष जीत सिंह खरवार ,नगर पंचायत अध्यक्ष कमलेश मोहन ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन कर संयुक्त रूप से किया। सर्वप्रथम कवयित्री प्रीति पांडे ने मां सरस्वती की वंदना प्रस्तुत कर कवि सम्मेलन का आगाज किया, जिसके बाद देर रात तक कविताओं और शेरो–शायरी की रौनक बनी रही।
प्रयागराज से आए हास्य कवि बिहारीलाल अंबर ने अपनी रचना के माध्यम से संदेश दिया कि किसी के दिल में गीता है, कोई कुरान रखता है, लेकिन वतन का बच्चा-बच्चा दिल में हिंदुस्तान रखता है। उनकी इस साम्प्रदायिक सौहार्द पर केन्द्रित पंक्तियों ने श्रोताओं से खूब वाहवाही लूटी।प्रशांत बजरंगी ने “राम नेत्री राम का, वो मंदिर बना दिया” जैसी पंक्तियों के जरिये मर्यादा पुरुषोत्तम राम के आदर्शों और आस्था की गरिमा को सधे अंदाज में मंच से रखा, जिस पर श्रोताओं ने तालियां बजाकर समर्थन जताया। उनकी प्रस्तुतियों में आध्यात्मिक भाव के साथ सकारात्मक सामाजिक संदेश भी झलकता रहा।प्रतापगढ़ की कवयित्री प्रीति पांडे ने “खुशी की लहर है उदासी न समझो, यह कलियों सी ताजा है, बासी न समझो, यह मां हैं, बहनें, बेटियां, पत्नियां हैं, इन्हें अपने चरणों की दासी न समझो” जैसी पंक्तियों के माध्यम से महिला सम्मान और नारी गरिमा का सशक्त पक्ष रखा। उनकी प्रभावशाली प्रस्तुति पर पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
दुद्धी की धरती को समर्पित ओजपूर्ण पंक्तियां प्रस्तुत करते हुए पंडित विजय लक्ष्मी शुक्ला ने कभी मानस की चौपाई-सी शुद्ध और सरल, तो कभी सागर-सी गहराई लिए इस क्षेत्र की पहचान को शब्दों में पिरोया। उन्होंने ककरीली और पथरीली राहों से गुजरकर भी समेकित मूल्यों से समतल हुई दुद्धी की धरती को कविता का केंद्र बनाकर श्रोताओं से सीधा जुड़ाव बनाया।बनारस से आए इमरान बनारसी ने “देश पर कुर्बान होना चाहिए, सबका ये अरमान होना चाहिए, हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई जो भी हो, दिल में हिंदुस्तान होना चाहिए” जैसे संदेश के साथ राष्ट्रीय एकता का राग छेड़ा। उनकी देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुति पर श्रोताओं ने खड़े होकर उत्साह प्रकट किया। वाराणसी के दमदार बनारसी ने सोशल मीडिया पर व्यूज की अंधी दौड़ पर तीखा व्यंग्य करते हुए कहा कि थोड़े से व्यूज पाने के चक्कर में कुछ बच्चियों के जिस्म से कपड़े उतर जाने जैसी संवेदनहीनता समाज के लिए गंभीर चेतावनी है। उनकी रचना ने मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी पर भी श्रोताओं को सोचने पर मजबूर किया।
अखिलेश द्विवेदी ने अपनी पंक्तियों में कहा कि इंसान चाहे अपना दर्द बांटे या न बांटे, लेकिन हंसी और खुशी सबके साथ साझा करनी चाहिए। उन्होंने गम भुलाकर मिल-बैठने और रिश्तों में अपनापन बढ़ाने का संदेश दिया, जिसे श्रोताओं ने बेहद पसंद किया।
कार्यक्रम में कौमी एकता समिति दुद्धी के संरक्षक रविंद्र जा ०, अध्यक्ष राम लोचन तिवारी, कोषाध्यक्ष मदन तिवारी, नगर पालिका परिषद सोनभद्र की अध्यक्ष रूबी प्रसाद ,जिला पंचायत सदस्य जुबेर आलम ,दिलीप पांडे ,डॉ गौरव सिंह ,डॉ के चौरसिया ,बालकृष्ण जा० ,रमीज आलम, सत्यनारायण यादव ,देवेश मोहन सहित बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी व गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम को कौमी एकता, साहित्यिक संवाद और सामाजिक समरसता के अनूठे मंच के रूप में लंबे समय तक याद किया जाएगा।अंत में कौमी एकता समिति के अध्यक्ष रामलोचन तिवारी सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
सोनभद्र, तहसील रिपोर्टर दुद्धी, विवेक सिंह