राजेश कुमार तिवारी इंडियन टीवी न्यूज़
कटनी। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच कभी-कभी ऐसे उदाहरण सामने आते हैं, जो केवल व्यवस्था नहीं, बल्कि सोच को भी प्रभावित करते हैं। ऐसा ही एक प्रेरक दृश्य बुधवार को ढीमरखेड़ा क्षेत्र के हरदी गांव में देखने को मिला, जब कलेक्टर आशीष तिवारी ने अपने व्यवहार से जल संरक्षण का संदेश दिया।
गांव के निरीक्षण पर पहुंचे कलेक्टर तिवारी ने गली-गली पैदल भ्रमण कर ‘नल-जल योजना’ की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान वे प्रत्येक घर के सामने रुककर जल आपूर्ति की स्थिति की जानकारी लेते रहे और यह सुनिश्चित किया कि ग्रामीणों को पर्याप्त एवं नियमित पानी मिल रहा है या नहीं।
निरीक्षण के दौरान उनकी नजर सड़क किनारे खुले नल पर पड़ी, जिससे पानी लगातार बह रहा था। इसे देखते ही वे वहीं रुक गए और उपस्थित ग्रामीणों को जल के महत्व के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि जल केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार है और इसकी बर्बादी भविष्य में गंभीर संकट को जन्म दे सकती है।
इसके बाद कलेक्टर स्वयं नल के पास पहुंचे, पहले उसी पानी से अपनी प्यास बुझाई और फिर अपने हाथों से नल को बंद कर दिया। उनका यह छोटा सा कदम एक बड़ा संदेश बन गया कि परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से करनी चाहिए।
कलेक्टर की इस सादगी और संवेदनशीलता से ग्रामीण प्रभावित नजर आए। उनके इस व्यवहार ने न केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी का परिचय दिया, बल्कि आमजन के बीच जल संरक्षण के प्रति जागरूकता का सकारात्मक संदेश भी पहुंचाया।
हरदी गांव में उस दिन केवल निरीक्षण ही नहीं हुआ, बल्कि एक महत्वपूर्ण सीख भी दी गई—यदि हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे, तो पानी की हर बूंद को बचाया जा सकता है।