बारीपदा, 18/09: भक्ति, श्रद्धा और परंपरा के अनूठे उदाहरण के रूप में बारीपदा के भुइयांगोड़ा बालिबादी साही में पिछले 39 वर्षों से लगातार हरिनाम संकीर्तन का आयोजन किया जा रहा है। साही के निवासी निमाई चांद घोष, पिता स्वर्गीय अनंत लाल घोष के घर में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला यह हरिनाम संकीर्तन अब क्षेत्रवासियों के बीच एक धार्मिक परंपरा का रूप ले चुका है।इस वर्ष आयोजन के अवसर पर 17 सितंबर को अधिवास कार्यक्रम संपन्न हुआ। वहीं 18 सितंबर की सुबह करीब 5:30 बजे हरिनाम संकीर्तन का शुभारंभ किया गया। इसके बाद लगातार आठ प्रहर तक संकीर्तन का आयोजन किया जा रहा है। धार्मिक आयोजन में आसपास के विभिन्न गांवों के अलावा दूर-दराज क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।दिनभर संकीर्तन मंडप हरिनाम के जयघोष से गूंजता रहा और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से हरिनाम संकीर्तन का श्रवण करने के साथ-साथ संकीर्तन दलों के नृत्य और संगीत का भी आनंद लिया। हरिनाम संकीर्तन को लेकर पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है।इस वर्ष अष्टप्रहरी संकीर्तन में विभिन्न स्थानों से चार संकीर्तन दलों ने भाग लिया है। दलों द्वारा हरिनाम, मृदंग, करताल और नृत्य की प्रस्तुति से संकीर्तन स्थल चहल-पहल से भर उठा। भक्तों और श्रद्धालुओं ने लंबे समय तक धार्मिक आयोजन में शामिल होकर हरिनाम संकीर्तन का आनंद लिया।आयोजन को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए आयोजक निमाई चांद घोष के साथ उनके पुत्र बलराम घोष और स्वरूपानंद घोष सक्रिय रूप से जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। कार्यक्रम का प्रत्येक कार्य व्यवस्थित और अनुशासित तरीके से संपन्न हो, इसके लिए वे लगातार निगरानी रख रहे हैं।
इसके अलावा परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों, मित्रों और ग्रामीणों ने एकजुट होकर इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में सहयोग किया। पिछले 39 वर्षों से जारी यह हरिनाम संकीर्तन क्षेत्र की धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और आपसी सहयोग का सुंदर उदाहरण बन चुका है।
मयूरभंज से हिमांशु शेखर प्रहराज।