बारीपदा, 19/9: मयूरभंज जिले के जशीपुर ब्लॉक के रामतीर्थ में शनिवार को ‘आम सिमिलिपाल योजना’ (ASY) के तहत एक आवासीय कौशल विकास केंद्र का उद्घाटन किया गया। राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया ने इस केंद्र का उद्घाटन किया।सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व के आसपास स्थित आदिवासी गांवों के लोगों को वैकल्पिक आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना तथा उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य है।आरसीसीएफ-सह-फील्ड डायरेक्टर प्रकाश चंद्र गोगिनेनिनी ने बताया कि प्रारंभिक चरण में केंद्र में 60 महिलाओं को मोबाइल असेंबली तथा 30 युवक-युवतियों को नेचुरलिस्ट-कम-गाइड के रूप में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया ने कहा कि स्थायी आजीविका और वन्यजीव संरक्षण के बीच समन्वय स्थापित करते हुए आगे बढ़ना आवश्यक है। उन्होंने सिमिलिपाल की जैव विविधता एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के लोगों के आर्थिक सशक्तीकरण पर भी जोर दिया।राज्य सरकार ने ‘आम सिमिलिपाल योजना’ के लिए 125 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इस योजना के तहत सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व के पाददेश के आसपास स्थित करीब 200 गांवों को शामिल किया गया है। जंगल पर निर्भर समुदायों को वैकल्पिक आय के अवसर उपलब्ध कराकर उनकी वन पर निर्भरता कम करना तथा शिकार और वन्यजीवों के अवैध शिकार को हतोत्साहित करना इस योजना का प्रमुख उद्देश्य है।योजना के तहत मुख्य रूप से स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्यम से विभिन्न आजीविका कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा। इनमें साल के पत्तों से पत्तल-दोना निर्माण, सिलाई एवं हस्तशिल्प, शहद प्रसंस्करण, दुग्ध उत्पादन, मुर्गी पालन, बकरी एवं भेड़ पालन, कृषि तथा कम अवधि वाली गैर-धान फसलों की खेती जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।गोगिनेनिनी ने कहा कि यह पहल ‘जीवन-जीविका’ की अवधारणा पर आधारित है। स्थायी रोजगार के अवसर पैदा होने से स्थानीय समुदाय की संरक्षण गतिविधियों में भागीदारी भी और मजबूत होने की उम्मीद है।सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व प्राधिकरण और इको डेवलपमेंट कमेटी (ईडीसी) संयुक्त रूप से इस योजना का क्रियान्वयन एवं निगरानी करेंगे। इसके लिए अब तक 25 ईडीसी का गठन किया जा चुका है।उद्घाटन समारोह में सिमिलिपाल दक्षिण एवं उत्तर, करंजिया तथा रायरंगपुर डिवीजन के डीएफओ सहित वन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
मयूरभंज से हिमांशु शेखर प्रहराज।