इंडियन टीवी न्यूज नेशनल छत्तीसगढ़ स्टेट हेड रिपोर्टर किशोर कुमार
भिलाई।
भिलाई के बैकुंठ धाम क्षेत्र में नगर निगम द्वारा डंप किए जाने वाले कचरे के बीच गौमाता भोजन तलाशने को मजबूर नजर आ रही हैं। यह दृश्य कई गंभीर सवाल खड़े करता है। बेजुबान पशु आखिर अपना पेट भरने के लिए कचरे के ढेर तक पहुंचने को क्यों मजबूर हैं? उनकी सुरक्षा और भोजन की व्यवस्था की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?
कचरे में घरों से निकलने वाले विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट पदार्थ मौजूद हो सकते हैं, जो गौवंश के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। भूख से परेशान गौमाता इसी कचरे के बीच अपने लिए भोजन तलाशती दिखाई देती हैं। यह स्थिति पशुओं की सुरक्षा और उनके प्रति हमारी जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करती है।
दूध के समय अपनी, बाकी समय लावारिस क्यों?
अक्सर यह सवाल उठता है कि कुछ पशुपालक गायों से दूध प्राप्त करने के बाद उन्हें खुले में छोड़ देते हैं। यदि ऐसा हो रहा है, तो संबंधित पशुपालकों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। गौ माता की सेवा केवल दूध प्राप्त करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उनकी नियमित देखभाल, चारे-पानी की व्यवस्था और सुरक्षा भी पशुपालकों की जिम्मेदारी है।
वहीं, गौ सेवा का संकल्प लेने वाले लोगों और संगठनों से भी अपील है कि वे ऐसी परिस्थितियों को देखकर मौन न रहें, बल्कि अपनी क्षमता के अनुसार आगे आकर पशुओं की सहायता करें।
नगर निगम और जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल
बैकुंठ धाम क्षेत्र में कचरे के उचित प्रबंधन की क्या व्यवस्था है?
कचरे के ढेर तक पहुंचने वाले गौवंश को सुरक्षित रखने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
खुले में घूमने वाले पशुओं के मालिकों की पहचान कर उनकी जिम्मेदारी तय की जाएगी या नहीं?
गौवंश के लिए सुरक्षित चारे-पानी और उचित देखभाल की व्यवस्था कौन करेगा?
इन सवालों पर संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों को ध्यान देने की आवश्यकता है।
गौ सेवा केवल नारे नहीं, जिम्मेदारी भी है
गौ माता के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना तभी सार्थक होगा, जब उनके जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा के लिए भी प्रयास किए जाएं। केवल धार्मिक भावनाएं व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है; पशुओं को भूख, गंदगी और संभावित बीमारियों से बचाना भी जरूरी है।
दूध चाहिए तो देखभाल भी करनी होगी। जो पशुपालक गायों को घर पर रखकर उनकी उचित देखभाल नहीं कर सकते, उन्हें पशुओं को लावारिस छोड़ने के बजाय उनके लिए जिम्मेदार और सुरक्षित व्यवस्था करनी चाहिए।
बैकुंठ धाम क्षेत्र की यह तस्वीर नगर निगम, पशुपालकों और गौ सेवा से जुड़े संगठनों के लिए आत्ममंथन का विषय है। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग मौके की स्थिति का निरीक्षण करें और गौवंश की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाएं।
हमारी अपील है—गौ माता को कचरे में भोजन तलाशने के लिए मजबूर न होने दें। उनकी सेवा, सुरक्षा और देखभाल हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।