इंडियन टीवी न्यूज चैनल छत्तीसगढ़ स्टेट हेड रिपोर्टर किशोर कुमार
भिलाई।
नगर पालिक निगम भिलाई की परियोजना शाखा में कराए गए पेवर ब्लॉक कार्यों को लेकर जांच के बाद अनियमितताओं का मामला सामने आया है। लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा की संयुक्त जांच में 29 अनुबंधों के कार्यों की जांच की गई। रिपोर्ट के अनुसार, 21 अनुबंधों में माप पुस्तिका में दर्ज मात्रा की तुलना में मौके पर कम मात्रा पाए जाने की बात सामने आई और ₹16,85,457 की राशि को अधिक भुगतान से संबंधित बताया गया है।
जांच के बाद अधिकारियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया
मामले में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई तथा राशि की वसूली के निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इसी क्रम में तीन अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की रिपोर्ट है।
इनमें नितेश मेश्राम, प्रभारी कार्यपालन अभियंता भिलाई निगम, विनिता वर्मा, पूर्व में भिलाई और वर्तमान में कार्यपालन अभियंता दुर्ग निगम तथा संजय अग्रवाल, पूर्व में भिलाई और वर्तमान में कार्यपालन अभियंता जगदलपुर निगम शामिल बताए गए हैं।
तीनों अधिकारियों से निर्धारित समय सीमा में स्पष्टीकरण मांगे जाने की जानकारी सामने आई है।
भाजपा ने FIR की मांग उठाई
मामले को लेकर भाजपा की ओर से भी कार्रवाई की मांग की गई है। रिपोर्टों के अनुसार भाजपा जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन ने ज्ञापन सौंपकर संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की तथा कार्रवाई नहीं होने पर निगम मुख्यालय घेराव की चेतावनी दी।
वहीं, भाजपा विधायक रिकेश सेन की ओर से भी मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है।
जांच समिति गठित
मामले की आगे जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित किए जाने की जानकारी है। समिति में अजीत कुमार तिग्गा (SE) को अध्यक्ष, कुलदीप कुमार गुप्ता (EE) को सदस्य और संजय कुमार वर्मा (EE) को सचिव बनाया गया है। समिति को मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट निर्धारित समय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट पर निर्भर
पेवर ब्लॉक कार्यों को लेकर सामने आई जांच रिपोर्ट में मुख्य आपत्ति कार्य की मात्रा और भुगतान से संबंधित बताई गई है। एक उप-अभियंता की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण में कुछ कार्यों के वर्तमान पुनर्मापन में माप पुस्तिका के अनुरूप पाए जाने का दावा भी किया गया है।
अब आगे की कार्रवाई जांच समिति की रिपोर्ट, संबंधित अधिकारियों के स्पष्टीकरण और सक्षम स्तर पर लिए जाने वाले निर्णय के आधार पर होगी। फिलहाल मामले में ₹16.85 लाख की रिकवरी से संबंधित जांच और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।