लिलजी बांध के किसानों ने तात्कालिक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की 10 जुलाई 2010 लिलजी बांध में खेती कर किसानों को पट्टा देने की घोषणा 16 वर्ष बाद भी पूरी नहीं होने से किसानों में काफी आक्रोश है लिलजी बांध के किसानों ने फिर से आंदोलन का आगाज शुरू कर यह मांग की है कि लिलजी बांध में गिर्दावली कराकर धान विक्रय पंजीयन कराया जाय खसरा के कालम नंबर 12 में वर्तमान कब्जा के आधार पर नाम दर्ज कराया जाए लिलजी बांध की अति वर्षा से खराव हुई फसल का मुआवजा दिलाया जाए लिलजी बांध के किशौरा गांव के झिन्ना मोड में सभा करके मुख्यमंत्री के नाम द्वारा रामपुर बघेलान तहसीलदार को ज्ञापन पत्र सौपा गया मुख्य वक्ता अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव बादल सरोज ने कहा लिलजी बांध के किसानों ने आंदोलन का फिर से आगाज किया है और यह आंदोलन मुख्यमंत्री की घोषणा पूरा कराके किसानों के हाथों में पट्टा मिलने तक जारी रहेगा ज्ञापन लेने आए तहसीलदार मंगलेश्वर सिंह बघेल ने तीन-चार दिन में सर्वे करा कर गिर्दावली कराने की बात कही है यदि तीन-चार दिन में सर्वे शुरू नहीं हुआ तो अगला पड़ाव रीवा कमिश्नरी में घेरा डालो डेरा डालो होगा कार्यक्रम में मध्य प्रदेश किसान सभा के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष रामजीत सिंह सीटू यूनियन के नेता गिरजेश सिंह सेगर प्रदेश सचिव शिवराम सिंह राज्य समिति सदस्य रामनरेश सिंह ब्लॉक अध्यक्ष रामराज सिंह ब्लाक महासचिव भोला प्रसाद कुशवाहा इंजी आशुतोष सिंह के के शुक्ला एड सूर्यभान सिंह ज्ञानचंद्र त्रिपाठी केमला पटेल अजय तिवारी अमित सोहगौरा संजय निगम राकेश सिंह त्रिवेणी प्रसाद पाठक राजेंद्र सिंह पुष्पेंद्र पटेलराजेश्वर सिंह मोतीलाल सिंह प्रहलाद पटेल मंगलेश पटेल पप्पू पांडे रोहित पाठक सुरेश सिंह अनिल सिंह चंदन सिंह सोनू सिंह एडवोकेट जितेंद्र सिंह इंद्र गोपाल सिंह शिवप्रसाद त्रिपाठी गेदाल सिंह धनेश सिंह ज्ञानेंद्र सिंह राम उजागर सिंह मनोज सिंह प्रवीण पटेल धर्मेंद्र सिंह विकास सिंह मानसिंह नवल किशोर साहू अशोक साहू अच्छे लाल सकेत अजय केवट कोदू लाल सकेत भूषण सिंह रामनरेश साकेत रामानंद पाठक सरदार चौधरी रामकरण सिंह नागेंद्र सिंह नीरज पाठक जवाहर केवट सुग्रीव केवट शत्रुघ्न सिंह संपत सिंह कमलेश्वर सिंह रामाधार सिंह सूर्यभान सिंह नरेंद्र तिवारी ज्ञानेंद्र सिंह रामनरेश नामदेव दुकौडी सिंह मनमोहन सिंह बाल्मीक कोरी सचिन साकेत रामदेव प्रजापति महेंद्रसिंह आदि हजारों किसान सामिल रहे