नगरी।
नगरी विकासखंड में आदिवासी विद्यार्थियों को बेहतर आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित छात्रावासों की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एक ओर नगरी मुख्यालय में 250 सीटर अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास का विशाल भवन उपलब्ध है, वहीं दूसरी ओर दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में संचालित छात्रावासों की नियमित निगरानी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। आरोप है कि दो छात्रावासों की जिम्मेदारी एक ही अधीक्षक के पास होने के कारण रिसगांव स्थित छात्रावास का संचालन चपरासी के भरोसे हो रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों की देखरेख और छात्रावास की दैनिक व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, नगरी मुख्यालय में वर्ष 2021 में 250 सीटर अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास भवन का निर्माण किया गया था। इसका उद्देश्य नगरी अंचल के दूरस्थ गांवों से आने वाले गरीब एवं जरूरतमंद आदिवासी विद्यार्थियों को बेहतर आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना है। विकासखंड में प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास रिसगांव में 35 विद्यार्थी तथा प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास सांकरा में 36 विद्यार्थी निवासरत बताए जा रहे हैं। वहीं पोस्ट-मैट्रिक बालक छात्रावास रिसगांव में लगभग 20 विद्यार्थी हैं। इसके अलावा सांकरा का पोस्ट-मैट्रिक बालक छात्रावास भवन जर्जर होने के कारण नगरी मुख्यालय स्थित 250 सीटर भवन में संचालित हो रहा है।
20 किलोमीटर दूर छात्रावास, निगरानी पर सवाल
बताया जा रहा है कि रिसगांव स्थित पोस्ट-मैट्रिक बालक छात्रावास नगरी मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर वनांचल क्षेत्र में संचालित है। वहीं संबंधित अधीक्षक का अधिकांश समय नगरी मुख्यालय में रहने की बात सामने आ रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि दूरस्थ छात्रावास में विद्यार्थियों की नियमित देखरेख, भोजन व्यवस्था, साफ-सफाई, पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण और अन्य जरूरी सुविधाओं की निगरानी किस तरह की जा रही है।
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि अधीक्षक की नियमित अनुपस्थिति में छात्रावास की जिम्मेदारी चपरासी के भरोसे रहती है। यदि ऐसा है, तो यह व्यवस्था विद्यार्थियों की सुरक्षा और बेहतर देखरेख के लिहाज से गंभीर विषय है। हालांकि, इस संबंध में विभागीय स्तर पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
विधायक के निरीक्षण के बाद भी व्यवस्था पर सवाल
कुछ दिन पहले क्षेत्रीय विधायक ने नगरी स्थित 250 सीटर अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास का औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान छात्रावास की व्यवस्थाओं और विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का जायजा लिया गया। विधायक ने विद्यार्थियों से सीधे संवाद कर दैनिक गतिविधियों, अध्ययन व्यवस्था, भोजन, बिजली, खेल सामग्री सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली थी।
निरीक्षण के दौरान संबंधित अधीक्षक ने चार छात्रावासों की देखरेख की जिम्मेदारी होने की बात कही थी। इसके बावजूद दूरस्थ क्षेत्र में संचालित छात्रावासों की नियमित निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। निरीक्षण के बाद भी यदि व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है, तो विभागीय अधिकारियों को इसकी समीक्षा करनी चाहिए।
जिम्मेदारी तय करने की जरूरत
इस मामले में संबंधित अधीक्षक से जब नगरी मुख्यालय में रहने और रिसगांव स्थित छात्रावास की देखरेख के संबंध में जानकारी मांगी गई, तो उन्होंने विस्तृत जानकारी के लिए मंडल संयोजक से संपर्क करने की बात कही।
अब सवाल यह है कि क्या एक अधीक्षक के पास चार छात्रावासों की जिम्मेदारी होने से सभी संस्थानों की नियमित निगरानी संभव हो पा रही है? क्या दूरस्थ छात्रावासों में विद्यार्थियों की सुरक्षा, भोजन, आवास और पढ़ाई की व्यवस्था की नियमित जांच की जा रही है? इन सवालों का जवाब विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
विद्यार्थियों के हित में जरूरी है कि विभागीय अधिकारी छात्रावासों का नियमित निरीक्षण करें, अधीक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करें और जहां आवश्यकता हो, वहां जिम्मेदारियों का पुनर्निर्धारण करें। इससे दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी बेहतर आवासीय एवं शैक्षणिक सुविधाएं मिल सकेंगी।
संवाददात विवेक कन्नौजे
नगरी धमतरी छत्तीसगढ़
