*बिहार मोतीहारी से अमरजीत सिंह*
जिलाधिकारी ने शिक्षा विभाग में ‘वेतन घोटाले’ के आरोपियों पर 10-10 हजार का इनाम
मोतिहारी में शिक्षा विभाग में गबन मामले के बाद डीएम का आदेश, अब गड़बड़ी मिलने पर मेकर, चेकर और अप्रूवर पर कार्रवाई होगी.
मोतिहारी: बिहार के पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में शिक्षा विभाग के अंदर फर्जी नामों पर शिक्षकों के वेतन भुगतान के जरिए करीब 60 लाख रुपये की सरकारी राशि गबन का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है. इस मामले में दो कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के महज 24 घंटे के अंदर पुलिस अधीक्षक ने दोनों आरोपियों पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया है.
जिलाधिकारी सुमन सौरभ यादव ने वित्तीय अनियमितताओं पर लगाम लगाने के लिए बड़ा प्रशासनिक आदेश जारी किया है. शिक्षा विभाग में फर्जी लोगों के नाम पर वेतन भुगतान के जरिए करीब 60 लाख रुपये गबन का मामला प्रकाश में आने के बाद नगर थाना में कांड संख्या 1054/26 दर्ज किया गया.FIR दर्ज होते ही फरार हुए अपराधी
इस मामले में मोहम्मद इमादुद्दीन शाबिर पिता मोहम्मद जलालुद्दीन शाबिर, निवासी सिसहनी, थाना कुंडवाचैनपुर और अमन कुमार पिता सत्यनारायण प्रसाद, निवासी नया मोहल्ला छतौनी बाजार, थाना छतौनी को प्राथमिक अभियुक्त बनाया गया है. एफआईआर दर्ज होने के बाद दोनों आरोपी फरार बताए जा रहे हैं.जानकारी देने वाले को मिलेगी इनाम की राशि
पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए 10-10 हजार रुपये के इनाम की घोषणा की गई है. पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि यदि किसी को इन दोनों के बारे में सटीक जानकारी मिले तो सूचना दें. सूचना देने वाले व्यक्ति को इनाम की राशि दी जाएगी और उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी.सभी विभागों में शत-प्रतिशत जांच अनिवार्य
जिला स्थापना शाखा, समाहरणालय पूर्वी चंपारण की ओर से पत्रांक 1465, दिनांक 27 अक्टूबर 2026 के माध्यम से जिले के सभी निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों को निर्देश जारी किया गया है. गृह विभाग और शिक्षा विभाग के अंतर्गत अधिकारियों, कर्मियों और शिक्षणेत्तर कर्मियों के वेतन भुगतान से जुड़े आंकड़ों की शुरुआती जांच में कई गंभीर विसंगतियां सामने आई थी.
अब मुख्यालय समेत संबंधित विभागों के शत-प्रतिशत अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन एवं भत्तों की जांच वरीय पदाधिकारी से कराई जाएगी. जांच पूरी होने और भुगतान की प्रक्रिया की पुष्टि होने के बाद ही अक्टूबर 2026 का वेतन जारी किया जाएगा. यह व्यवस्था केवल एक महीने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हर महीने वेतन भुगतान से पहले इसी तरह जांच कराना अनिवार्य होगा.मेकर, चेकर और अप्रूवर भी होंगे जवाबदेह
जिलाधिकारी के आदेश की सबसे अहम बात यह है कि अब किसी भी वित्तीय गड़बड़ी के लिए सिर्फ भुगतान तैयार करने वाले कर्मी को ही जिम्मेदार नहीं माना जाएगा. यदि पिछले भुगतानों की जांच में किसी तरह की अनियमितता या गलत भुगतान सामने आता है तो संबंधित बिल के मेकर, चेकर और अप्रूवर के खिलाफ भी विधिसम्मत आपराधिक और अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी.
जरूरत पड़ने पर बिल के मेकर, चेकर और अप्रूवर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी और अतिरिक्त भुगतान की गई सरकारी राशि की वसूली भी सुनिश्चित की जाएगी. मेकर, चेकर और अप्रूवर की जिम्मेदारी प्राथमिकता के आधार पर नियमित पदाधिकारियों और कर्मियों को ही सौंपी जाएगी ताकि वेतन भुगतान की पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही तय हो और लापरवाही या मिलीभगत की गुंजाइश खत्म हो.
रिपोर्ट;अमरजीत सिंह

